News By : Vanita
बदलते मौसम के साथ लोगों की दिक्कते और तकलीफें भी बदलती जा रही है। जैसे-जैसे सर्दियों का पाला बढ़ता जा रहा है। वैसे- वैसे गरीब और बेघरों की मुसीबतें उनके लिए कहीं न कहीं जानलेवा बनती जा रही है। पेट भरने के लिए गांव और दूर-दराज से चंद पैसे कमाने लिए लाखों लोग बड़े-बड़े शहरों में आ बसते है। गर्मियों में तो सड़क या फिर फुटपाथ पर रहकर यह लोग जैसे-तैसे अपना गुजर-बसर कर लेते है, लेकिन इनकी असली परेशानी तो बरसात और सर्दियों के मौसम में शुरू होती है। सर्दियों में तो यह परेशानी और भी ज्यादा बढ़ जाती है। सर्दियों में तो फुटपाथ पर रात बिताना इनके लिए मौत को न्यौता देने के बराबर होता है। पलायन कर रहे लोगों की परेशानियों को ही दूर करने के लिए ही सरकार ने शहर-शहर रैन बसेरे बनवाएं है। जिन लोगों के पास घर की सुविधा नहीं होती, वह लोग रैन बसेरों में रहकर अपना गुजर-बसर करते है। रैन बसेरों की सुविधा देश के हर हिस्से में उपलब्ध करवाई जा रही है।
क्यों जरूरी है रैन बसेरा
रैन बसेरा जैसा कि इसके नाम से जाहिर हो रहा है, कि रहने के लिए बसेरा। रैन बसेरों की सबसे ज्यादा जरूरत पलायन कर रहे लोगों के लिए होती है। रैन बसेरा, बेसहारा लोगों को कंपकपाती सर्दी से बचाने का काम करता है, और रहने की जगह उपलब्ध करवाता है।
रैन बसेरा में क्या-क्या उपलब्ध करवाती है प्रशासन
रैन बसेरा में समय गुजार रहे लोगों को प्रशासन कई सुविधाओं उपलब्ध करवाती है। प्रशासन द्वारा सबसे पहले उन्हे रहने के लिए कमरे की सुविधा दी जाती है। जिसमें पानी से लेकर बिजली तक की सारी चीजे मौजूद होती है। इसी के साथ रैन बसेरा में रह रहे लोगों को हीटर की सुविधा भी दी जाती है। साथ ही साथ सोने के लिए एक चारपाई और ठंड से बचने के लिए रजाई भी दी जाती है।
दिल्ली-एनसीआर समेत अन्य राज्यों में क्या है रैन बसेरों के हालात
दिल्ली-एनसीआर समेत अन्य राज्यों में रैन बसेरा बेहद ही दयनीय स्थिति में है। हालांकि कि पहले के मुकाबले अब इनके हालातों में प्रशासन ने बेहद सुधार जरूर किए है। कश्मीरी गेट स्थित रैन बसेरे में रात के समय में ठहरने वालों लोगों की इतनी भीड़ उमड़ जाती है। कि बसेरों में जगह ही कम पड़ जाती है। वहीं कई जगह रैन बसेरों में न तो पानी की सुविधा होती है, और न ही बिजली की। इसी के साथ कई रैन बसेरे तो बेहद ही खस्ता हालत में होते है। हालांकि सरकार रैन बसेरों पर धीरे-धीरे सुधार कार्य कर रही है।