पाकिस्तान में वैसे तो कानून नाम की कोई चीज नहीं है। हां नाम के लिए या फिर ऐसे कहें कि दुनिया को दिखाने के लिए संविधान का गठन किया गया है। पाकिस्तान में इस समय वैसे ही गृह युद्ध की स्थिति बनी हुई है। सरकार की चल नहीं रही और इमरान खान ने पाकिस्तान की सरकार को परेशान करके रखा है। ऐसे में तालिबान युद्ध विराम को तोड़कर हमले करने के आदेश जारी कर दिए हैं।
टीटीपी ने जारी किया बयान
आतंकवादी संगठन तहरीके तालिबान पाकिस्तान ने बयान में कहा कि यह कदम उसने इसलिए उठाया, क्योंकि आतंकियों के खिलाफ अलग-अलग इलाकों में सैन्य अभियान चल रहा है। यह बयान इंग्लैंड क्रिकेट टीम के 17 साल बाद पहली टेस्ट-सीरीज खेलने के लिए पाकिस्तान में आने के एक दिन बाद और नए सेना प्रमुख के पदभार ग्रहण करने के एक दिन पहले जारी किया गया है। ऐसे में पाकिस्तान के लिए बड़े स्तर पर चिंता का विषय बन जाता है। प्रतिबंधित संगठन का कहना है कि खैबर-पख्तूनख्वा प्रांत के बन्नू और लक्की मारवात इलाकों में सैन्य संगठनों द्वारा लगातार हमलों की एक श्रृंखला शुरू करने के बाद संघर्ष विराम को समाप्त करने का निर्णय लिया गया है।
कौन है यह टीटीपी आतंकी संगठन
तहरीक-ए तालिबान पाकिस्तान पाकिस्तान और अफगानिस्तान में मौजूद आतंकवादी संगठन है, जिसका गठन 2007 में हुआ था। टीटीपी का लक्ष्य खैबर पख्तूनवा प्रांत से पाकिस्तानी सरकार का नियंत्रण खत्म करना और यहाँ आतंक के जरिए शरिया कानून लागू करना चाहता है। टीटीपी को आतंकी संगठन अल-कायदा का करीबी माना जाता है, को पूरे पाकिस्तान में कई घातक हमलों के लिए दोषी ठहराया गया है, जिसमें 2009 में सेना मुख्यालय पर हमला, सैन्य ठिकानों पर हमले और 2008 में इस्लामाबाद के मैरियट होटल में बमबारी शामिल है।
2012 में मलाला यूसुफजई पर भी किया था हमला
2012 में नोबेल पुरस्कार विजेता मलाला यूसुफजई पर टीटीपी ने हमला किया था। मलाला को गोली लगने के बाद पेशावर के सैन्य अस्पताल (सीएमएच) में भर्ती कराया गया और फिर आगे के इलाज के लिए लंदन ले जाया गया। टीटीपी ने हमले की जिम्मेदारी लेते हुए कहा कि यूसुफजई एक पश्चिमी सोच वाली लड़की है।