देश में लगे लॉकडाउन के बीच राजधानी दिल्ली के निजामुद्दीन से जो तश्वीरें सामने आईं इसके बाद पूरे देश में सनसनी फैल गई। वहीं इस मरकज और तबलीगी जमात को लेकर कई सवाल भी उठने लगे। ऐसे में इस तबलीगी जमात के तार बिहार से भी जुड़े हैं। बता दें कि बिहार में तब्लीगी जमात और उसके मरकज़ में शामिल लोगों की खोज करते-करते पिछले 36 घंटों में उन 70 विदेशी प्रचारकों का पता चला है जो महीनों से बिहार में रह रहे थे।
वैसे तो जमात का देश में एक मात्र सेंटर दिल्ली में है जिन्हें मरकज के नाम से जानते हैं, लेकिन असलियत ये है कि पटना के नूरी मस्जिद से पूरे बिहार का नेटवर्क ऑपरेट होता है। या फिर आप नूरी मस्जिद को बिहार का मरकज भी कह सकते है। यहां सालों भर हजारों की तादाद में लोग जुटा करते हैं और फिर इस्लाम का प्रचार प्रसार करके के लिए पूरे बिहार का दौरा करते हैं।
आपको बता दें कि नूरी मस्जिद की देखरेख कर रहे मोहम्मद इरशाद बताते हैं कि नूरी मस्जिद बिहार तबलीगी जमात का मुख्य केंद्र हैं जहां से पूरे सूबे का नेटवर्क या कहें वर्किंग प्लानिंग होती है। समूचे देश-विदेश के लोग सालों भर इस्लाम धर्म का प्रचार प्रसार और लोगों को धर्म के बारे में समझाने के लिए जब बिहार आते हैं तो सबसे पहले वो नूरी मस्जिद ही आते हैं।
बता दें कि पटना में 31 लोग मिले जिसमें से किर्गिस्तान के 16, कजाकिस्तान का एक और नेपाल के 14 धर्म प्रचारक मिले। इसके अलावा बक्सर में 11 लोग मिले जिसमें से सात इंडोनेशिया के और चार मलेशिया के धर्म प्रचारक हैं। इसके अलावा किशनगंज में 11 और अररिया में नौ धर्म प्रचारक मिले हैं जो कि इंडोनेशिया, मलेशिया और बांग्लादेश के हैं। वहीं समस्तीपुर में भी आठ बांग्लादेशी धर्म प्रचारक मिले। इनमें से अधिकांश का कोरोना वायरस टेस्ट अभी तक निगेटिव आया है, लेकिन उन्हें क्वारंटाइन कर रखा गया है। राज्य सरकार को इतनी बड़ी संख्या में धर्म प्रचारकों के राज्य में होने का अंदाज़ा नहीं था। इन सब से पहले किर्गिस्तान देश के कुछ लोग दीघा में पकड़े गए थे जिन्हें पुलिस ने अभी 14 दिनों के क्वारेंटाइन में रखा है, ये सभी विदेशी पहले इसी नूरी मस्जिद पहुंचे थे। फिर स्थायी जमाती के साथ समनपुरा और फुलवारीशरीफ के संगी मस्जिद गए थे।
मोहम्मद इरशाद के मुताबिक तबलीगी जमात का सेंटर पटना के नूरी मस्जिद के अलावा बिहार के कई जिलों में है, लेकिन सीमांचल के इलाकों में जहां मुसलमान बहुल आबादी है वहां जमात का मजबूत सेंटर है. इसमें अररिया का जामा मस्जिद, किशनगंज का खानकाह, पूर्णिया का लाइन बाजार मस्जिद और कटिहार का मदरसा शामिल है। इसके अलावा सिवान का गोरहट्टा मदरसा, बक्सर का नया भोजपुर जामा मस्जिदके साथ बिहारशरीफ, पटना के फुलवारीशरीफ का संगी मस्जिद और समनपुरा मस्जिद से भी तबलीगी जमात के लोग अपने नेटवर्क को ऑपरेट करते हैं।
वहीं अब इस मामले के बाद गृह मंत्रालय ने पटना के नूरी मस्जिद को भी बंद करवा दिया है।