चुनावी साल आते ही बिहार की सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। इसी बीच बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से शुक्रवार को ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में आयोजित पूर्वी क्षेत्र परिषद की बैठक में बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिए जाने की मांग एक बार फिर उठाई। उन्होंने कहा, पिछले कुछ वर्षों में विकास दर दोहरे अंक में हासिल करने के बावजूद विकास के प्रमुख मापदंडों में हम राष्ट्रीय औसत से नीचे हैं।
सीएम नीतीश ने पिछड़ा क्षेत्र विकास निधि (बीआरजीएफ) के तहत बकाया राशि जारी करने का मामला उठाया। उन्होंने कहा कि केंद्र से अभी 911.82 करोड़ रुपया मिलना है। नीति आयोग के पास 510.91 करोड़ के विरुद्ध 500 करोड़ रुपए की पथ प्रक्षेत्र की योजना स्वीकृति हेतु भेजी गयी है। उन्होंने आगे कहा, कई अन्य राज्य भी बिहार की तरह गरीबी रेखा, प्रति व्यक्ति आय, औद्योगिकीकरण और सामाजिक व भौतिक आधारभूत संरचना में पिछड़े हैं। ऐसे पिछड़े राज्यों को एक समय सीमा में पिछड़ेपन से उबारने और राष्ट्रीय औसत के समकक्ष लाने के लिए सकारात्मक नीतिगत पहल की जरूरत है। उन्होंने पिछड़े राज्यों को मुख्यधारा में लाने के लिए जरूरी नीतिगत ढांचा तैयार करने की जरूरत बताई।
मुख्यमंत्री ने कहा, पिछड़ेपन से निकल कर विकास के राष्ट्रीय औसत स्तर को प्राप्त करने के लिए बिहार जैसे अन्य पिछड़े राज्यों को विशेष राज्य का दर्जा मिलना आवश्यक है। मुख्यमंत्री ने शाह के सामने मांग दोहराते हुए कहा, बिहार को विशेष राज्य का दर्जा मिले, जिससे हमें हमारा वाजिब हक मिल सके और देश की प्रगति में बिहार योगदान दे सके।