देश के सबसे दिग्गज बैंक भारतीय स्टेट बैंक ने 220 डिफॉल्टर्स के 76,000 करोड़ रुपये के ऋण को बट्टे खाते (राइट ऑफ) में डाल दिया है. हर एक डिफॉल्टर्स पर लगभग 100 करोड़ रुपये का ऋण है. RBI से RTI की मदद से बैंकों का आधार ब्रेकअप मिला है, जिसमें 31 मार्च 2019 तक बैंकों ने 100 करोड़ रुपये से लेकर 500 करोड़ रुपये के बुरे ऋण को बट्टे खाते में डाल दिया है. जानकारी के मुताबिक, सभी कॉमर्शियल बैंकों द्वारा 100 करोड़ रुपये व उससे अधिक के बुरे ऋण का कुल 2.75 लाख करोड़ रुपये बट्टे खाते में डाला गया है.
RBI ने की 980 खातों की पहचान
जानकारी के मुताबिक, 500 करोड़ रुपये व उससे ज्यादा दिए गए लोन के कुल 67,600 करोड़ रुपये को फंसे ऋण के तौर पर घोषित किया गया है. RBI ने 980 लेनदारों की पहचान की है, जिन्होंने 100 करोड़ रुपये व उससे अधिक का ऋण लिया है और बैंकों ने इन्हे बट्टे खाते में डाल दिया है. जिसमें से 220 खाते SBI में हैं. इस तरह के हर एक खाते में तकरीबन 348 करोड़ रुपये माफ किया गया है.
डिफॉल्टर खातों के मामले में PNB का स्थान दूसरा
500 करोड़ रुपये से ज्यादा के ऋण वाले 71 खातों में 33 से 44 प्रतिशत खाते SBI के हैं. इसी तरह कतार बढ़ते हुए दूसरे नंबर पर पंजाब नेशनल बैंक है. PNB ने भी 100 करोड़ रुपये से ज्यादा का ऋण लेने वाले 94 खाताधारकों का ऋण माफ किया है. PNB के लिए कुल रकम 27,024 करोड़ रुपये है. हर एक खाते का लगभग 287 करोड़ रुपये माफ किया गया है. पीएनबी ने 500 करोड़ रुपये से ज्यादा का ऋण लेने वाले 12 सबसे बड़े डिफॉल्टर्स का 9,037 करोड़ रुपये का ऋण माफ कर दिया है.
प्राइवेट बैंकों में आईडीबीआई सबसे आगे
पब्लिक सेक्टर के बैंकों में एसबीआई और पीएनबी इस लिस्ट में सबसे ऊपर है तो वहीं प्राइवेट बैंकों में आईडीबीआई अव्वल रहा. 100 करोड़ व उससे अधिक के लोन को राइट ऑफ करने वाले बैंकों में आईडीबीआई तीसरा सबसे बड़ा कॉमर्शियल बैंक रहा. आईडीबीआई बैंक में 100 करोड़ रुपये से ज्यादा का ऋण लेने वाले 71 लेनदार रहे, जिन्होंने कुल 26,219 करोड़ रुपये का लोन लिया है. 100 करोड़ रुपये से अधिक के कर्ज लेने वाले लेनदारों की संख्या केनरा बैंक में 63 रही. जबकि 500 करोड़ रुपये से ज्यादा का ऋण लेने वाले लेनदरों की संख्या 7 है. इन्होंने कुल 27,382 करोड़ रुपये का ऋण लिया है.
प्राइवेट बैंकों पर नज़र डाले तो एक्सिस बैंक में 43 लेनदार और आईसीआईसीआई बैंक में 37 लेनदारों के खाते रहे. इसी क्रम में आगे बढ़ते हुए सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया और इंडियन ओवरसीज बैंक में 4 डिफॉल्टर्स हैं. यह आंकड़ों को RBI से RTI एप्लिकेशन के जरिए हासिल किया गया है.