कुमारस्वामी सरकार का हुआ ‘THE END’, तारीखवार जानें बीते 18 दिन की हर हलचल

20 दिन से चल रहे सियासी उठापटक के बाद आखिरकार कल कुमारस्वामी सरकार का द एंड हो गया है. कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन सरकार विश्वासमत हासिल नहीं कर पायी. कुमारस्वामी ने राज्यपाल को इस्तीफा सौंप दिया है जिसे कबूल भी कर लिया गया है.

बीजेपी का कर्नाटक में रास्ता साफ़ हो गया है. विश्वास प्रस्ताव में बीजेपी की जीत के बाद येदुरप्पा आज राज्यपाल वजुभाई वाला से मिल कर सरकार बनाने का दावा पेश कर सकते हैं. इससे पहले उन्होंने पीएम मोदी और अमित शाह से चर्चा करने की बात कही है.

यह सियासी नाटक 6 जुलाई से शुरू हुआ, इन 18 दिनों में कर्नाटक में क्या क्या हुआ हम आपको बता रहे हैं-

6 जुलाई:कांग्रेस के 10 और जेडीएस के तीन विधायक ने विधानसभा अध्यक्ष के कार्यालय में उनकी गैर हाजिरी में इस्तीफा सौंपा. लेकिन मुख्यमंत्री कुमारस्वामी के कर्नाटक में मौजूद नहीं रहने के कारण इस मामले को आगे के लिए टाल दिया गया.

7 जुलाई: कुमारस्वामी अमेरिका यात्रा से वापस लौटे जिसके बाद उन्होंने कांग्रेस और जेडीएस के नेताओं के साथ बैठक की. बैठक में मुख्यमंत्री के पिता एचडी देवेगौड़ा, कांग्रेस के सिद्धरमैय्या, दिल्ली से आए कर्नाटक के प्रभारी के सी वेणुगोपाल और जेडीएस के नेता और सरकार में मंत्री डीके शिवकुमार भी शामिल हुए. बैठक के बाद मुख्यमंत्री कुमारस्वामी ने कहा कि ये बैठकें राजनीतिक घटनाक्रम को लेकर नहीं बल्कि सामान्य प्रशासनिक कामों को लेकर हो रही हैं.

8 जुलाई:सभी मंत्रियों ने बागियों को संतुष्ट करने के वास्ते उन्हें मंत्रिमंडल में शामिल किये जाने के लिए अपने अपने पार्टी नेताओं को इस्तीफा दिया. कांग्रेस के 21 मंत्रियों के मंत्रिमंडल से इस्तीफे के तुरंत बाद जदएस के मंत्रियों ने इस्तीफे दिये. मुख्यमंत्री कार्यालय ने ट्विटर पर बताया, जदएस के सभी मंत्रियों ने भी कांग्रेस के 21 मंत्रियों की तरह इस्तीफे दे दिये हैं. मंत्रिमंडल में जल्द ही फेरबदल होगा.

दो निर्दलीय विधायकों का इस्तीफा: कुछ घंटों के अंतर पर एच नागेश और आर शंकर ने मंत्री पद से इस्तीफा दिया और सरकार से समर्थन वापस लिया. उन्होंने बीजेपी को समर्थन देने का ऐलान किया. इसके साथ ही मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी के अलावा कांग्रेस विधायक दल के नेता सिद्धारमैया के सामने सरकार बचाने की चुनौती और कठिन हो गई. इसके बाद भी सीएम कुमारस्वामी ने दावा किया कि मामला सुलझ गया है, कैबिनेट का पुनर्गठन होगा.

9 जुलाई:कांग्रेस ने विधयाक दल की बैठक बुलाई लेकिन उसमें 20 विधायक नहीं शामिल हुए. पार्टी ने कहा कि बागी विधायक बैठक में शामिल नहीं हुए हैं उनके खिलाफ कार्यवाई की जाएगी.वही दूसरी ओर कांग्रेस को एक और झटका लगा जब ससपेंड चल रहे विधायक रोशन बेग ने विधानसभा में अपना इस्तीफा सौपा.

10 जुलाई:कर्नाटक की राजनीति में नाटक के बीच दो और कांग्रेस विधायकों डॉ के सुधाकर और एम टी बी नागराज ने भी पार्टी से इस्तीफा दे दिया. दो इस्तीफों के बाद विधानसभा के परिसर में माहौल काफी हंगामे भरा रहा. विधायक डॉ के सुधाकर को कांग्रेस के नेताओं ने खींचकर केजी जॉर्ज के कमरे में कैद करके रखा गया बाद में उनके साथ हाथापाई भी हुई. मारपीट के बाद दोनों विधायकों डॉ के सुधाकर और एम टी बी नागराज को किसी अज्ञात जगह ले जाया गया है ताकि इन्हें मनाया जा सके. इन दो इस्तीफों के साथ कुमारस्वामी की सरकार जाना पूरी तरह से तय हो गया.

17 जुलाई:SC ने अपने अंतरिम आदेश में कहा कि बागी विधायकों को विधानसभा सत्र में शामिल होने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता. कोर्ट का कहना था कि स्पीकर अपनी इच्छा से फैसला ले सकते हैं.

18 जुलाई:कुमारस्वामी ने विधानसभा में विश्वास प्रस्ताव पेश किया. इसमें कहा गया कि सदन को उनकी अध्यक्षता वाले मंत्रिपरिषद पर विश्वास है. लेकिन लंबी बहस के बाद भी इस पर वोटिंग नहीं हो सकी. जब सदन में विश्वास मत पेश हुआ तो 16 बागी समेत 19 विधायक गैरहाज़िर थे.

19 जुलाई:राज्यपाल वजूभाई वाला ने शुक्रवार तक ही फ्लोर टेस्ट के लिए कुमारस्वामी सरकार के लिए समय सीमा तय की लेकिन राज्यपाल की ओर से जारी दोनों डेडलाइन का उल्लंघन किया और तय समयसीमा के भीतर फ्लोर टेस्ट नहीं हुआ. विधानसभा 22 जुलाई तक स्थगित की गयी.

23 जुलाई:विश्वास मत प्रस्ताव पर चली चार दिन की बहस के बाद शाम करीब 7:30 बजे वोटिंग की प्रक्रिया शुरू की गयी. सत्ता पक्ष और विपक्ष की वोटिंग की गिनती क एबाद करीब 7:40 पर स्पीकर को रिपोर्ट सौंपी और उसके बाद नतीजे साफ़ हो गए. कुमारस्वामी की सरकार 99 पर आउट हो गयी जबकि सरकार के विरोध में 105 विधायक थे.वोटिंग के वक़्त सदन में कुल 204 विधायक ही मौजूद थे.

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