चुनाव के मौसम में छलका किसानों का दर्द,कहा ‘‘हमलोग नोटा का चयन करेंगे।’’

समूचे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गन्ने से लदे ट्रक मिलों में जाने की बाट जोह रहे हैं। हालांकि ट्रकों में लदे ये मीठे रसीले गन्ने बकाया भुगतान नहीं होने और कम कीमत अदायगी की मार से परेशान गन्ना किसानों की कड़वी कहानी बयां करते हैं।

देश के चीनी के कटोरे के नाम से मशहूर पश्चिमी उत्तर प्रदेश का यह समूचा इलाका चुनाव प्रचार के इस मौसम में पोस्टरों, झंडों, रैलियों से पटा पड़ा है। लेकिन इस चुनाव ने कई किसानों के घाव हरे कर दिए हैं।

ऐसा प्रतीत होता है कि पार्टियों द्वारा किये गये वादों के पूरा नहीं होने के कारण इलाके में नोटा (इनमें से कोई नहीं) विकल्प के उपयोग के स्वर अधिक उठ रहे हैं क्योंकि यहां के किसानों का कहना है कि वे वादों से तंग आ चुके हैं और उन्हें नहीं पता कि किस पर भरोसा किया जाये।

कैराना में करीब 30साल से गन्ने की खेती कर रहे निराश किसान ओम सिंह कहते हैं, हमलोग नोटा का चयन करेंगे। उनका कहना है कि वह अपने परिवार का भरण-पोषण तक नहीं कर पा रहे हैं।

हर किसान को कम से कम डेढ़ लाख रुपया बकाया राशि का भुगतान होना शेष है।कैराना, बागपत और मुजफ्फरनगर में कुल 11चीनी मिलें हैं और ट्रकों में लदे ये गन्ने इन मिलों में जाने का इंतजार कर रहे हैं।

उपज तौले जाने के इंतजार में बागपत की रामला चीनी मिल के आगे बैठे 55वर्षीय सत्यवीर ने कहा पांच दशक से मेरा परिवार गन्ना उगा रहा है। हमारी आजीविका इसी से चलती है। लेकिन राजनीतिक दलों के झूठे वादों से हम तंग आ गए हैं।

उन्होंने कहा कि मिल प्रबंधक हमें कहते हैं कि सरकार से उनका पैसा मिलते ही हमें बकाया मिल जाएगा। लेकिन कब…?सत्यवीर को दो लाख रूपये से अधिक की बकाया राशि मिलनी है।

भाषा

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