जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) के अध्यक्ष यासीन मलिक को सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम के तहत जम्मू की जेल में शिफ्ट करने का फैसला लिया गया है.
अलगाववादी नेता को 22 फरवरी की देर रात छापेमारी में पुलिस ने गिरफ्तार किया था. मलिक को उनके मैसूमा निवास से गिरफ्तार किया गया था और कोठीबाग पुलिस स्टेशन ले जाया गया था.
14 फरवरी को पुलवामा आतंकी हमले के मद्देनजर सरकार ने अलगाववादियों पर बड़े पैमाने पर कार्रवाई शुरू की.
17 फरवरी को, सरकार ने घोषणा की थी कि जम्मू और कश्मीर में छह अलगाववादी नेताओं की सुरक्षा वापस ले ली जाए जिसमें अलगाववादी नेता मीरवाइज उमर फारूक, अब्दुल गनी भट, बिलाल लोन, हाशिम कुरैशी, फजल हक कुरैशी और शब्बीर शाह से के नाम शामिल थे.
अधिकारियों ने कहा था कि किसी भी बहाने से, उन्हें या किसी अन्य अलगाववादि को कोई सुरक्षा बल या कवर प्रदान नहीं किया जाएगा. इसके साथ ही सरकार द्वारा दी गयी सभी सुविधाओं को भी वापस ले लिया गया था.
15 फरवरी को, केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा था कि सरकार अलगाववादी नेताओं के स्पष्ट संदर्भ में पाकिस्तान और उसकी खुफिया एजेंसी आईएसआई के इशारे पर काम कर रहे लोगों की सुरक्षा की समीक्षा करने की योजना बना रही है. सिंह ने कश्मीर के दौरे के अंत में संवाददाताओं से कहा था, ऐसे तत्व और शक्तियां हैं जो पाकिस्तान और आईएसआई से पैसा लेते हैं. मैंने संबंधित अधिकारियों से उनकी सुरक्षा की समीक्षा करने के लिए कहा है.