Haryana Congress Crisis: हरियाणा विधानसभा चुनाव में धुंआधार जारी चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। कांग्रेस की पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और सिरसा सांसद कुमारी शैलजा पार्टी से नाराज चल रही है। बताया जा रहा है कि पार्टी आलाकमान के टिकट बंटवारे को लेकर शैलजा अलग थलग होती दिख रही है। पार्टी ने हुड्डा गुट के ज्यादा नेताओं को टिकट वितरण में ज्यादा तरजीह दी है। इसी वजह से वह एक सप्ताह से पार्टी के चुनाव प्रचार अभियान में नहीं दिख रही है।
पिछले एक सप्ताह से उन्हें कोई प्रेस रिलीज भी जारी नहीं की है। सूत्रों का कहना है कि वह अपने आवास पर अपने समर्थकों और कार्यकर्ताओं से मिल रही है। कांग्रेस पार्टी में दो फाड़ चुनाव परिणाम पर बड़ा असर डाल सकती है। इससे पहले भी शैलजा और हुड्डा पार्टी की बैठकों और जनसभाओं में एक साथ कम ही देखे जाते थे।
दरअसल, कांग्रेस ने हरियाणा की 90 विधानसभा सीटों पर 89 प्रत्याशी उतारे हैं। सूत्रों की मानें तो 89 में से 72 सीटों पर पार्टी ने हुड्डा के कहने पर टिकट दिया है। कुमारी शैलजा के 9 करीबियों को टिकट दिया गया है। इसी बात को लेकर शैलजा पार्टी के चुनाव प्रचार से दूर है। टिकट बंटवारे तक शैलजा ने पार्टी के लिए जमकर चुनाव प्रचार किया और यात्राएं भी निकाली।
कांग्रेस में फूट को लेकर सत्तारूढ़ बीजेपी इसे बड़ा मुद्दा बना रही है। पार्टी का कहना है कि कांग्रेस दलित का उत्थान नहीं चाहती है। 18 सितंबर को ही पूर्व केंद्रीय मंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता अनुराग ठाकुर ने कहा था कि हुड्डा परिवार आज तक एक दलित बेटी कुमारी शैलजा का सम्मान नहीं कर पाया, तो बाकी प्रदेशभर के दलितों के लिए क्या सम्मान करेंगे।
पार्टी में कोई गुटबाजी नहीं- कांग्रेस
इससे पहले बसपा सुप्रीमो मायावती के भतीज आकाश आनंद ने शैलजा को बसपा में शामिल होने के लिए कहा था। हालांकि, अभी तक शैलजा की ओर से किसी भी तरह की कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। माना जाता है कि हरियाणा में तीन गुट बन चुके हैं। हुड्डा गुट, शैलजा गुट और सुरजेवाला गुट। इस बीच कांग्रेस किसी भी गुटबाजी से इंकार कर रही है।