Delhi: केन्द्र सरकार ने तीन नए आपराधिक कानूनों को लेकर अधिसूचना जारी कर दी। यह नए कानून एक जुलाई से लागू होंगे। इसमें कहा गया है कि ब्रिटिश काल के भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), भारतीय साक्ष्य अधिनियम और आपराधिक प्रक्रिया संहिता (CrPC) की जगह लेने वाले तीन नए आपराधिक कानून 1 जुलाई से लागू होंगे।
यह तीनों नए आपराधिक कानून भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम हैं। बता दें कि, इन तीनों कानूनों को शीतकालीन सत्र के दौरान दोनों सदनों से पारित किया था। इसके बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के पास सहमति के लिए भेजा था। राष्ट्रपति की सहमति मिलने के बाद केन्द्र सरकार ने अधिसूचना जारी कर दी।
यह तीनों कानून भारतीय साक्ष्य अधिनियम 1872, आपराधिक प्रक्रिया संहिता 1973 और आईपीसी की जगह लेंगे। विशेषज्ञों के अनुसार, तीन नए कानून आतंकवाद, मॉब लिंचिंग और राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डालने वाले अपराधों के लिए सजा को और अधिक सख्त बना देंगे।
गौरतलब है कि, भारतीय न्याय संहिता (आईपीसी) में जहां 20 नए अपराध जोड़े गए हैं, वहीं आईपीसी में मौजूद 19 प्रावधानों को हटा दिया गया है। साथ ही 33 अपराधों में कारावास की सज़ा बढ़ा दी गई है। 83 प्रावधानों में जुर्माने की सज़ा को बढ़ाया गया है, जबकि 23 अपराधों में अनिवार्य न्यूनतम सज़ा का प्रावधान किया गया है और 6 अपराधों में ‘सामुदायिक सेवा’ की सज़ा का प्रावधान किया गया।
कितने बदल जाएंगे कानून ?
बता दें कि, पहले बलात्कार की धारा 375, 376 थी, अब जहां से अपराधों की बात शुरू होती है, उसमें धारा 63, 69 में रेप को रखा गया है। गैंगरेप को भी आगे रखा गया है। बच्चों के खिलाफ अपराध को भी आगे लाया गया है। हत्या की धारा 302 थी, अब 101 हुई। 18 साल से कम उम्र की बच्ची से रेप में आजीवन कारावास और मौत की सजा का प्रावधान है। गैंगरेप के दोषी को 20 साल तक की सजा या जिंदा रहने तक जेल।