Atal Bihari Vajpayee Death Anniversary: जब अटल की मौत से ठन गई, यों लगा वो जिंदगी से बड़ी हो गई

जूझने का मेरा इरादा न था,

मोड़ पर मिलेंगे इसका वादा न था,

रास्ता रोककर वह खड़ी हो गई,

यों लगा जिंदगी से बड़ी हो गई।

ठन गई मौत से ठन गई।

नई दिल्लीःकई दिनों तक मौत से जूझने के बाद 16अगस्त 2018 को काल के कपाल पर लिखने-मिटाने का माद्दा रखने वाले भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी इस दुनिया को छोड़कर चले गए थे। अटल ऐसे जननेता थे, जिन्हें देखने और सुनने के लिए लोगों की भारी भीड़ उमड़ती थी। पूर्व प्रधानमंत्री अपने भाषणों में शब्दों को ऐसे पिरोते थे, जिन्हें सुनकर न सिर्फ उनके चाहने वाले बल्कि विरोधी भी तारीफ करने को मजबूर हो जाते थे। सदन में नेता प्रतिपक्ष का मौका हो,बतौर प्रधानमंत्री या संयुक्त राष्ट्र में दिया गया उनका संबोधन, हर मौकों पर अटल बिहारी वाजपेयी के संबोधन जहां लोगों का दिल जीत लेते थे, वहीं विपक्षी नेताओं को भी अपना मुरीद बना लेते थे।

पूरा भाषण कभी नहीं लिखते थे, लेकिन दिमाग में पूरा खाका रहता था

अटल बिहारी वाजपेयी की खासियत यह थी कि वह अपने भाषणों में मौकों के हिसाब से शब्दों का उपयोग करते थे। उनको करीब से जानने वाले बताते हैं कि सार्वजनिक भाषणों के लिए वह कोई खास तैयारी नहीं करते थे, लेकिन जब लोकसभा में भाषण देना होता था तो वो इसके लिए बहुत मेहनत करते थे। अटल जी संसद के पुस्तकालय से पुस्तकें, पत्रिकाएं और अखबार मंगवाकर देर रात तक पढ़ते थे। उसके बाद वह अपने भाषण की तैयारी करते थे। कुछ विषयों पर लिखने के बाद वो उस पर बहुत विचार करते थे। अटल जी की एक बात और खास थी कि वो अपना पूरा भाषण कभी नहीं लिखते थे, लेकिन उनके दिमाग में पूरा खाका तैयार रहता था कि अगले दिन उन्हें लोकसभा में क्या-क्या बोलना है।

…जब पाकिस्तानियों ने कहा, यह शख्स यहां होता तो भी चुनाव जीत जाता

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के करीबी बताते हैं कि अटल जी अद्भुत प्रतिभा के धनी थे। अटल जी जबपाकिस्तान के लाहौर की यात्रा पर गए थे तो उस दौरान बड़ा ही दिलचस्प वाक्या देखने को मिला था। दरअसल, सभी लोग लाहौर के गवर्नर के घर पर थेऔरवहां पर अटल जी ने ऐसा जबरदस्त भाषण दिया था कि पाकिस्तान के कई लोगों के मुंह से अनायास ही निकल पड़ा कि यदि यह शख्स पाकिस्तान में चुनाव लड़ेगा तो यहां भी जीत जाएगा।

भूतपूर्व प्रधानमंत्री कहने पर जब ली चुटकी

यह बात तब की है, जब दिल्ली में भाजपा की सरकार थी। दिल्ली के यमुना बाजार के पास फ्लाईओवर का उद्घाटन होना था। चूंकि दिल्ली में भाजपा की सरकार थी तो अटल बिहारी वाजपेयी को बतौर मुख्यअतिथि वहां बुलाया गया था। कुछ समय पहले ही केंद्र में अटल जी की सरकार बहुमत साबित नहीं कर पाने के कारण गिर गई थी। कार्यक्रम के दौरान अटल बिहारी वाजपेयी को संबोधित करते हुए जब भूतपूर्व प्रधानमंत्री कहा गया तो इस पर उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा था, पूर्व प्रधानमंत्री तो समझ आता है,लेकिन ये भूत कहां से आ गया।

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