नई दिल्ली: हमारे देश के पांचवें प्रधानमंत्री और किसानों के मसीहा कहे जाने वाले चौधरी चरण सिंह की आज पुण्यतिथि है। इस मौके पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ट्वीट कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। श्रद्धांजलि देते हुए उन्होंने लिखा, जननेता, किसानों के मसीहा, पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि!गांवों, अन्नदाता किसानों, शोषितों एवं वंचितों के उत्थान के लिए उन्होंने जो मार्ग दिखाए हैं, वे हम सभी के लिए अनुकरणीय हैं।
स्वतंत्र भारत के पांचवें प्रधानमंत्री यानी चौधरी चरण सिंह का जन्म 23 दिसम्बर सन 1902को उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में एक जाट परिवार में हुआ था। इनके पिता चौधरी मीर सिंह एक किसान थे। इनके परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद ही खराब थी, लेकिन फिर भी इन्होंने अपनी पढ़ाई को सर्वोपरि रखा। चौधरी सिंह ने प्रारम्भिक शिक्षा नूरपुर ग्राम से ही पूरी की। मेट्रिक इन्होने मेरठ के सरकारी उच्च विध्यालय से किया। फिर 1923 में यह विज्ञान के स्नातक हुए, दो वर्षों के बाद 1925 में कला स्नातकोत्तर की परीक्षा उत्तीर्ण की।इसके बाद वकील की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद गाजियाबाद में वकालत का कार्यभार सम्भाला।
बता दें कि इन्होंने आजादी के लिए लड़ी गई लड़ाई में भी काफी भूमिका निभाई। 1929 में चरण सिंह ने भारत के स्वतन्त्रता आन्दोलन में प्रवेश किया। उन्होंने डांडी मार्च में भी भाग लिया। इस दौरान इन्हें 6 माह के लिए जैल भी जाना पड़ा था। इसके अलावा 1940 के सत्याग्रह आन्दोलन में भी यह जेल गए। चौधरी चरण सिंह 28 जुलाई 1979 को प्रधानमंत्री बने। इस पद को उन्होंने 14 जनवरी 1980 तक सम्भाला। इनका कार्यकाल सिर्फ सात महीने का ही था लेकिन इस दौरान उन्होंने देश के किसान भाइयों की स्थति सुधारने व उनके अधिकार के लिए अथक प्रयास किये।
कहा जाता है कि जमीन से जुड़ा आदमी गरीबों की समस्याओं को समझता है वैसे ही गरीबी से जूझकर निकले चौधरी चरण सिंह ने किसानों की स्थिति सुधारने का अथक प्रयास किया। इन्होंने पुरे उत्तर प्रदेश के किसानों से मिल कर उनकी समस्या का निदान किया। कृषकों के प्रति प्रेम ने चरण सिंह को इतना सम्मान दिया की इन्हें अपनी जिंदगी में कभी हार का सामना नहीं करना पड़ा। वहीं, 29 मई 1987 को इनका निधन हो गया।