मंडी: आईआईटी मंडी हिमाचल का नाम विश्व स्तर पर ऊंचा करने में कई आयाम हासिल कर रहा है। कई ऐसे शोध हैं जो अक्सर सामने आते हैं और लोगों को इसके बारे में अच्छी जानकारी मिलती रहती है। अब एक नया शोध आईआईटी मंडी का सामने आया है जो लोगों के लिए काफी फायदेमंद साबित होगा।
हृदय रोगों से जुड़ा है शोध
व्यस्कों में हृदय रोगों के सबसे खतरनाक कारणों का हिमाचल प्रदेश के आईआईटी मंडी के शोधार्थियों ने पता लगाया है। उन्होंने शोध के परिणामों में पाया कि पर्यावरण प्रदूषण दिल की गंभीर बीमारियों का सबसे खतरनाक कारण है।
इन्होने किया शोध
केवल स्वयं धूम्रपान करने वाले को ही खतरा नहीं, बल्कि अप्रत्यक्ष रूप से धूम्रपान होने के कारण भी बहुत खतरा होता है। इन बीमारियों के लिए अनुवांशिक कारण, मधुमेह, उच्च कोलेस्ट्रॉल, डिप्रेशन भी बड़े कारण हैं। भारत में 45 वर्ष और अधिक उम्र के लोगों में हृदय रोगों (सीवीडी) के सबसे खतरनाक कारणों का पता लगाने के लिए आईआईटी मंडी के शोधकर्ताओं की एक टीम ने डॉ. रमना ठाकुर के मार्गदर्शन में अध्ययन किया है।
इतने लोगों पर किया विश्लेषण
शोधकर्ताओं ने भारत के गांव और शहर दोनों के 45 वर्ष उम्र के 59,000 से अधिक लोगों के डाटा का विश्लेषण किया और बीमारी के सबसे खतरनाक कारणों का पता लगाया। अध्ययन में यह देखा गया कि भारत के उम्रदराज व्यस्कों में सीवीडी के प्रकोप और इसके बढ़ने के लिए पर्यावरण प्रदूषण एक खतरनाक कारण है। भारत की अधिकतर आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है।
यह दिए गए हैं सुझाव
दिल के रोगों के खतरे को कम करने के लिए शोधार्थियों ने घर के अंदर वायु प्रदूषण कम करने और सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा बढ़ाने के लिए इस अध्ययन में कुछ सुझाव भी दिए हैं। इन तकनीकों के प्रयोग से सीवीडी की संभावना कम होगी। इनके मुताबिक घरों में तरल पेट्रोलियम गैस, सौर, बिजली और बायोगैस जैसी स्वच्छ तकनीकों का उपयोग बढ़ाया जाए।