जानिये क्यों मनाई जाती है होली, क्या इसके पीछे का महत्व

वंशिका सोनी

नई दिल्ली: भारत त्योहारों का देश है और यहां भिन्न-भिनन्न जाति के लोग अपने-अपने त्यौहार उत्साह और प्यार से मनाते हैं और इन्हीं त्यौहारों में से एक त्यौहार है होली। होली हिन्दू धर्म का एक प्रमुख त्यौहार है जो हर साल बसंत में मार्च (फागुन) के महीने में पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। इसे अन्य धर्मों के लोग बहुत धूमधाम से रंगों के साथ मनाते हैं। साथ ही लोग एक दूसरे के साथ नाचते- गाते और रंग लगाते, अलग-अलग राज्यों में सभी लोग अलग-अलग प्रकार के पकवान जैसे–घेवर, गुजिया, मावा पेड़े आदि बनाते हैं।

ब्रज में मनाई जाती है अलग तरह

भारत में होली का त्यौहार देखने के लिए लोग ब्रज,वृन्दावन,गोकुल जैसे स्थानों पर जाते हैं और फूलों के साथ इन जगहों पर यह त्यौहार कई दिनों तक मनाया जाता है।

होली का महत्व

सतयुग के समय में भगवान विष्णु के प्रिय भक्त प्रहलाद हुआ करते थे। जिनके पिता हिरण्यकश्यप असुरों के राजा थे जो अपने आप को भगवान मानते थे। वह अपने पुत्र की भगवान विष्णु के प्रति असिम भक्ति का विरोध किया करते थे और उन्हें चेतावनी भी दिया करते थे कि भगवान विष्णु की आराधना ना करें लेकिन प्रहलाद ने पिता की एक न सुनी और भक्ति में लीन रहते थे और इस बात पर पिता हिरण्यकश्यप ने कई बार अपने पुत्र को मारने की कोशिश भी की लेकिन वे इस कोशिश में असफल होते रहे। तमाम कोशिशों के बाद हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका की मदद लेने की सोची। होलिका को भगवान शिव ने वरदान दिया था की होलिका कभी भी आग में नहीं जल सकती।

हिरण्यकश्यप की साजिश नहीं हुई कामयाब

हिरण्यकश्यप ने एक चिता बनवायी जिसमें होलिका के साथ प्रहलाद को बैठा दिया जाता है और चिता को आग लगा दी जाती है। प्रहलाद चिता में बैठने के बाद भी विष्णु की आराधना में ही लीन रहते हैं और आग में होलिका जल जाती है। उसका वरदान भी निष्फल हो जाता है क्योंकि उसने अपने वरदान का दुरुपयोग किया था। वहीं प्रहलाद आग में बैठने के बाद भी अपनी भक्ति के कारन आग से सुरक्षित रहते हैं और आज तक उस दिन को होलिका दहन के नाम से मनाया जाता है और अगले दिन रंगो से इस दिन को मनाया करते है।

होली मनाने समय यह बातों का ध्यान रखें

1. होली वाले दिन कोशिश करें अपने सारे शरीर पर तेल या क्रीम का इसतेमाल करे ताकि रंग आसानी से निकल जाए।

2. हर्बल रंगो का उपयोग करना चाहिए, यह रंग हमारी त्वचा को किसी भी तरह से हानि नहीं पहुंचाएंगे।

3. होली में केमिकल एवं कांच वाले रंगो का प्रयोग न करें।

4. होली खेलने के लिए साफ पानी का प्रयोग करें।

5. होली के दिन ऐल्कोहॉल का सेवन न करें।

6. किसी भी वाहन पर पानी ना फेंके इससे दुर्घटना भी हो सकती है।

7. रोड पर किसी वाहन चलाते व्यक्ति पर पानी से भरे गुब्बारे न मारें।

8. होली पर ज्यादा पानी का बर्बाद न करें।

निष्कर्ष

होली की कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि बुराई का एक न एक दिन अंत हो ही जाता है। इस दिन सारे लोग अपने पुराने गिले-शिकवे भूल कर गले मिलते हैं और एक दूसरे को गुलाल लगाते हैं और एक-दूसरे को होली के पावन पर्व की शुभकामनाएँ देते हैं। होली अंदर के अहंकार और बुराई को मिटा कर सभी के साथ घुल-मिलकर, भाई-चारे, प्रेम और के साथ रहने का त्योहार है। होलिका दहन की रस्म से लोग अपनी बुराइयों को होलिका के साथ में खत्म करते है।

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