भोपाल: आजकल बागेश्वर धाम के कथावाचक धीरेन्द्र शास्त्री जी सुर्खियॉं में छाए हुए हैं। ऐसे में जानना जरुरी है कि कैसे एक कथावाचक का जीवन होता है। आइये आपको धीरेन्द्र जी के बचपन में ले चलते हैं। आस्था है, भरोसा है, साथ ही चमत्कार के दावे हैं. कोई ईश्वर का अवतार मानता है, तो किसी की नजरों में दीन दुखियों का दुख दूर करने वाला। किसी के लिए दिव्य दरबार है।
पिता भी थे कथावाचक
इस बीच पिता के साथ धीरेंद्र शास्त्री ने भी कथा वाचन शुरू कर दिया। धीरे-धीरे उन्होंने पिता से मिले संस्कारों को आगे बढ़ाना शुरू किया, अकेले ही आसपास के गांवों में कथा बांचने लगे। पहली बार साल 2009 में इन्होंने भागवत कथा पास के ही गांव में सुनाई थी। जिन लोगों ने उन्हें शुरुआती दिनों में देखा है वो कहते है कि धीरेंद्र शास्त्री के अंदर कथा कहने की एक अलग शैली थी, जो लोगों को काफी पसंद आती थी।
कथा बाचने से मिली प्रसिद्धि
इसलिए उन्हें आसपास के गांवों से भी बुलावा आने लगा और धीरे धीरे ये कथा बांचने में मशहूर होने लगे जब थोड़ा नाम हुआ तो धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने सोचा कि लोगों के घर जाने से बेहतर होगा कि ऐसी जगह बनायी जहां लोग आ कर उन्हें सुनें। इसके लिए सबसे पहले उन्होंने अपने गांव गढ़ा में बने भगवान शिव के प्राचीन मंदिर को अपना स्थान बनाया। जिसे आज बागेश्वर मंदिर के नाम से जाना जाता है।
दादा को मानते हैं अपना गुरु
बताया जाता है कि श्री बाला जी महाराज के मंदिर के पीछे धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के दादा सेतु लाल गर्ग सन्यासी बाबा की समाधि भी है। कहते हैं कि उनके दादाजी सिद्ध पुरुष थे। वे हर मंगलवार और शनिवार को इस मंदिर में दिव्य दरबार लगाते थे और लोगों की मन की बात जान लेते थे। उस समय भी लोग इसी तरह से अर्जी लगाते थे। खुद धीरेंद्र शास्त्री भी 9 वर्ष की उम्र में दादाजी के साथ इस मंदिर में जाया करते थे।
यह है बचपन की कहानी
इनका पूरा नाम है धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री। इनमें आस्था रखने वाले उन्हें बालाजी महाराज, बागेश्वर महाराज, धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के नाम से भी बुलाते हैं। इनका जन्म 4 जुलाई 1996 को मध्य प्रदेश में छतरपुर के गड़ा में हुआ था। यानि अगर उम्र देखें तो ये महज 26 साल के हैं। जो लोग धीरेंद्र शास्त्री को बचपन से जानते आए हैं, उनका कहना है कि बचपन से ही ये चंचल और हठीले थे, इनकी शिक्षा गांव के ही सरकारी स्कूल में हुई, हाईस्कूल और हायर सेकेंडरी की पढ़ाई धीरेंद्र ने पास के ही गंज गांव से की।