नई दिल्ली: तवांग में हुई भारत-चीन की सेनाओं की झड़प के बाद सरकार भले ही अपना पीठ थपथपा रही हो लेकिन विपक्ष इस मसले पर सरकार को लगातार घेर रही है। विपक्ष के अन्य दलों को साथ लेकर कांग्रेस इस मसले पर सरकार को घेड़ने की रणनीति बनाने में जुटा हुआ है तो वहीं कांग्रेस अध्यक्ष अध्यक्ष मलिकार्जुन खरगे भी सरकार पर हमलावर हैं। वो लगातार सरकार द्वारा जानकारी छुपाने के मामले को उठा रहे हैं। उन्होंने पहले ही राजनाथ सिंह के जवाब को लेकर असंतोष जाहिर किया है। खरगे ने सरकार के खिलाफ विपक्षी एकजुटता के मद्देनजर विपक्षी दलों की बैठक भी बुलाई है।
क्या है खरगे की योजना
समान विचारधारा रखने वाले उन सभी दलों को मल्लिकार्जुन खरगे की तरफ से न्योता भेजा गया है, जो इस मसले पर सरकार के रवैये से असंतुष्ट हैं। विपक्ष लगातार यह आरोप लगा रहा है कि सदन में उन्हें इस मुद्दे पर अपनी बात रखने का पर्याप्त समय नहीं दिया जा रहा है। उनका यह भी आरोप है कि सरकार से भी जिस प्रकार के जवाब की उम्मीद लगाई जा रही है, वो नहीं मिला है।
मंगलवार को सदन में सरकार पर साधा था निशाना
मंगलवार को सदन में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने चीन के आक्रामक रवैये को लेकर सरकार पर निशाना साधा था। उन्होंने कहा था कि सरकार मूकदर्शक बनकर रह गई है। खरगे ने अपने बयान में इस बात पर भी जोर दिया था कि चीन ने डेपसांग वाले इलाके में भी घुसपैठ करने की कोशिश की। वैसे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने साफ कर दिया था कि चीनी सैनिकों की साजिश को जमीन पर नाकाम कर दिया गया था।
राजनाथ के इस जवाब पर हुआ था विवाद
राजनाथ सिंह ने संसद में बताया था कि 9 दिसंबर 2022 को पीएलए सैनिकों ने अरुणाचल के तवांग सेक्टर के यांग्त्से में एलएसी पर अतिक्रमण कर यथास्थिति को एकतरफा बदलने का प्रयास किया। चीन के इस प्रयास का हमारी सेना ने दृढ़ता के साथ सामना किया. इस दौरान दोनों पक्ष आमने सामने आ गए। इसी बीच सैनिकों में हाथापाई भी हुई। इस झड़प में दोनों ओर के कुछ सैनिकों को चोटें आईं लेकिन झड़प में हमारे किसी सैनिक की मौत नहीं हुई।