नई दिल्ली: भारत-चीन के बीच 9 दिंसबर को अरुणाचल के तवांग में हिंसक झड़प हुई थी। इस मामले पर संसद के शीतकालीन सत्र में सोमवार से हंगामा चल रहा है। बुधवार को संसद भवन में विपक्ष इस गंभीर मामले पर स्थगन प्रस्ताव नोटिस पेश कर दिया है। सरकार पर चर्चा ना करने का आरोप लगाते हुए 17 विपक्षी दलों ने राज्यसभा से वॉकआउट कर दिया।
संसद के शीतकालीन सत्र को आज एक सप्ताह पूरे हो चुके हैं। सांतवे दिन चीन के साथ भारत की हुई हिंसक झड़प मुद्दे पर संसद के दोनों सदनों में विपक्षी पार्टियां जमकर हंगामा कर रही हैं। कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी के अलावा कई अन्य नेताओं ने लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव नोटिस दे दिया है।
क्या होता है स्थगन प्रस्ताव
संसद में स्थगन प्रस्ताव तब लाया जाता है जब किसी गंभीर मामले पर सदन का ध्यान आकर्षित करना हो। इसमें मौजूदा सरकार के खिलाफ आलोचना के तत्व भी शामिल होते हैं। इसे निचली सदन यानि लोकसभा में पेश किया जाता है। इस प्रस्ताव को मंजूर कराने के लिए विपक्षी दल को 50 सदस्यों के समर्थन की आवश्यकता होती है। स्थगन प्रस्ताव के मंजूरी के बाद सदन की सामान्य कार्यवाही में बाधा पड़ती है। सभी मामलों को रोककर स्थगन प्रस्ताव में शामिल किए गए मुद्दे पर चर्चा शुरू हो जाती है।
विपक्ष के नेताओं की बैठक जारी
अरुणाचल प्रदेश के तवांग इलाके में 9 दिसंबर को हुए भारत और चीन के बीच हिंसक मुद्दे पर विपक्ष केंद्र सरकार को संदन में घेरने की योजना बना रहा है। इस मुद्दे पर संयुक्त रणनीति बनाने के लिए राज्यसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकाजुर्न खड़गे के कक्ष में सभी विपक्षी दलो के नेताओं की बैठक हुई।
क्या है सरकार का पक्ष
भारत-चीन विवाद पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलाव को संसद में पूरे मामले पर विस्तृत जानकारी पेश की थी। उन्होंने कहा था कि तवांग इलाके में चीनी सेना ने घुसपैठ की कोशिश की थी। जिसका जवाब भारतीय जवानों ने बड़े ही बहादुरी से दिया और चीनी सेना को खदेड़ दिया। रक्षा मंत्री ने बताया था कि इस झड़प में भारतीय सेना का कोई भी जवान शहीद नहीं हुआ है। इसी मुद्दे पर विपक्ष केंद्र सरकार को घेरकर सदन में चर्चा करना चाहता है।