कश्मीर पर मोदी सरकार के एक फैसले से हमेशा के लिए पलट गई बाजी

आजादी के बाद 560 से ज्यादा देशी रियासतों के भारत में विलय कराने में सरदार पटेल की भूमिका अहम रही. आज सरदार पटेल की जयंती है और उनकी जयंती को मोदी सरकार ने अपने पहले कार्यकाल में राष्ट्रीय एकता दिवस मनाने का फैसला किया था. पीएम मोदी लगातार कहते रहे हैं कि सरदार पटेल अगर देश के पहले प्रधानमंत्री होते तो कश्मीर समस्या नहीं होती. जब अपने दूसरे कार्यकाल में मोदी सरकार ने जम्मू कश्मीर को मिले विशेष दर्जे को खत्म किया तो इसे सरदार पटेल का सपना पूरा करना बताया.

अब जम्मू कश्मीर दो हिस्सों में बंट चुका है. लद्दाख केंद्रशासित प्रदेश बन गया और जम्मू-कश्मीर को दिल्ली की तर्ज पर बना दिया गया जहां विधानसभा तो होगी लेकिन लेफ्टिनेंट गवर्नर होगा और ज्यादातर अधिकार उसी के पास होंगे. जम्मू का क्षेत्रफल और आबादी कश्मीर से ज्यादा है लेकिन विधानसभा सीटें अब तक घाटी में ज्यादा थीं. अब यहां परिसीमन कराने की बात हो रही है और ऐसा हुआ तो विधानसभा सीटें जम्मू में ज्यादा हो जाएंगी. जाहिर है जम्मू हिन्दू बहुल इलाका है लेकिन आजाद भारत में जम्मू-कश्मीर का मुख्यमंत्री कोई हिन्दू नहीं बना था. जम्मू से भी केवल गुलाम नबी आजाद ही एक बार सीएम बन पाए थे नहीं तो सीएम हमेशा घाटी का ही रहा.

मोदी सरकार का मास्टरस्ट्रोक

अनुच्छेद 370 को खत्म करना बीजेपी के घोषणापत्र का हमेशा से हिस्सा रहा है. पहले कार्यकाल में मोदी सरकार ने इसे नहीं छेड़ा लेकिन दूसरे कार्यकाल में तीन महीने के भीतर ही इसे खत्म कर दिया. अब जम्मू-कश्मीर का कोई अपना संविधान और अपना झंडा नहीं रहा. केंद्र की सारी योजनाएं अब लागू होंगी और विधानसभा का कार्यकाल भी छह साल के बदले पांच साल का होगा. इससे पहले भारत सरकार के पास यहां विदेश, रक्षा और संचार मामलों पर ही फैसला लेने का अधिकार था.

मोदी सरकार के इस फैसले को मास्टरस्ट्रोक की तरह देखा जा रहा है. कई लोग इस बात को मान रहे हैं कि इस फैसले से पाकिस्तान के पांव तले से जमीन खिसक गई है. पाकिस्तान ने मोदी सरकार के इस फैसले को मुसलमानों के खिलाफ फैसले के तौर पर पेश करने कोशिश की लेकिन मुस्लिम दुनिया से भी पाकिस्तान को साथ नहीं मिला. मलेशिया और तुर्की को छोड़कर दुनिया के सभी मुस्लिम देशों ने कश्मीर पर भारत के रुख का समर्थन किया. मोदी सरकार के इस फैसले को देशव्यापी समर्थन मिला और इसके हरियाणा और महाराष्ट्र में हुए चुनाव में बीजेपी को जीत भी मिली. अनुच्छेद 370खत्म होने के बात यह पहला जनादेश है और वो बीजेपी के पक्ष में आया.हाल ही में, जम्मू, कश्मीर, लेह और लद्दाख में ब्लॉक स्तर के चुनाव हुए तो 98फीसदी लोगों ने मतदान किया. पीएम मोदी ने खुद ट्वीट कर इसे ऐतिहासिक करार दिया था.

बदलेगा कश्मीर पर चर्चा का रुख

मोदी सरकार के इस फैसले के बाद अब चर्चा पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) की तरफ मुड़ गई है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिवाली के मौके पर कहा कि पाकिस्तान ने अवैध रूप से कश्मीर के एक हिस्से पर कब्जा कर रखा है जिसकी कसक उनके मन में बनी हुई है. पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के चेयरमैन बिलावल भुट्टो ने भी अपने एक बयान में कहा था कि पहले हम कश्मीर की बात करते थे, अब हम मुजफ्फराबाद (पीओके) को बचाने की योजना बनाने लग गए हैं.

एक तीर से दो निशाने

मोदी सरकार के लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाने के कदम के बाद पाकिस्तान के साथ-साथ चीन की भी नींद उड़ गई है. चीन ने इस फैसले को अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताया था. दरअसल, चीन का कश्मीर के एक बड़े हिस्से अक्साई चिन पर कब्जा है जो लद्दाख के ठीक पूर्व में स्थित है. लेकिन अब लद्दाख पर सीधे तौर पर केंद्र सरकार का शासन होगा जो चीन के लिए परेशानी का सबब बन गया है. कई विश्लेषकों का कहना है कि अब लद्दाख से लेकर अक्साई चिन तक अब भारत की पकड़ मजबूत होगी.

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