2 अक्टूबर 2014 को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वच्छ भारत अभियान की शुरुआत की थी। 2 अक्टूबर 2019 को फिर एक बार मोदी सरकार पर्यावरण की सुरक्षा के लिए, एक ही बार इस्तेमाल होने वाली प्लास्टिक की छुट्टी करने जा रही है। दरअसल इस तरह की प्लास्टिक का प्रयोग भले ही सस्ता व आसान हो लेकिन इसका पर्यावरण और मानव पर पड़ने वाला नुकसान बहुत अधिक है। आइए आज जानते हैं कि सिंगल यूज प्लास्टिक क्या होती है? इसके खतरनाक परिणाम क्या हैं? और इसकी जगह किन चीजों को इस्तेमाल किया जा सकता है।
सिंगल यूज प्लास्टिक क्या है और क्यों खतरनाक है ?
सिंगल यूज प्लास्टिक अर्थात एक ही बार प्रयोग में ली जाने वाली प्लास्टिक में प्लास्टिक की थैलियां, प्याले, प्लेट, छोटी बोतलें, स्ट्रॉ और कुछ पाउच सिंगल यूज प्लास्टिक हैं। ये दोबारा प्रयोग के लायक नहीं होती हैं। इसलिए एक बार प्रयोग करने के बाद इनको फेंक दिया जाता है। दरअसल इस तरह की प्लास्टिक पेट्रोलियम आधारित उत्पाद होते हैं। इनके उत्पादन पर खर्च बहुत कम आता है। यही वजह है कि रोजाना के बिजनस और कारोबारी इकाइयों में इसका इस्तेमाल धड़ल्ले से होता है। उत्पादन पर इसके भले ही कम खर्च हो लेकिन फेंके गए प्लास्टिक के कचरे, उसकी सफाई और उपचार पर काफी खर्च होता है। साथ ही यह पर्यावरण के लिए बहुत हानिकारक है। क्योंकि यह प्लास्टिक न तो पुनरावृत्ति के लायक है और न ही यह नष्ट होती है बल्कि यह धरती पर कचरे के रूप में बढ़ती रहती है।
प्लास्टिक के अंदर जो रसायन होते हैं, उनका इंसान और पर्यावरण के स्वास्थ्य पर काफी बुरा प्रभाव पड़ता है। प्लास्टिक की वजह से मिट्टी का कटाव काफी होता है। इसके अंदर का केमिकल बारिश के पानी के साथ जलाशयों में जाता है, जो काफी खतरनाक है। प्लास्टिक से जुड़े कुछ तथ्य आपको हैरान व परेशान कर सकते हैं। दुनिया भर में हर मिनट लोग करीब 10 लाख प्लास्टिक की बोतल खरीदते हैं। जितनी प्लास्टिक इस्तेमाल होती है, उनमें 91% प्लास्टिक रिसाइकल नहीं होती। अनुमान के मुताबिक, हर साल दुनिया भर में करीब 40 हजार करोड़ प्लास्टिक की थैलियों का प्रयोग होता है। उनमें से सिर्फ 1% थैलियों की रिसाइक्लिंग होती है। प्रतिदिन दुनिया भर में करीब 5 लाख स्ट्रॉ और 500 अरब प्लास्टिक के प्याले का इस्तेमाल होता है।
एक रिपोर्ट के मुताबिक, हर साल करीब 11 लाख समुद्री पक्षियों और जानवरों की प्लास्टिक की वजह से मृत्यु होती है। इसके अलावा 90 % पक्षियों और मछलियों के पेट में प्लास्टिक पाई गई। दरअसल प्लास्टिक छोटे-छोटे टुकड़ों में टूटकर समुद्र के अंदर रहती है। भोजन की तलाश में मछलियां और अन्य समुद्री जानवर गलती से इसका सेवन कर जाते हैं। एक रिसर्च के मुताबिक, करीब 700 समुद्री जीव प्लास्टिक प्रदूषण के कारण लुप्त होने की कगार पर हैं।
यदि आप सोचते हैं कि सिर्फ जानवर ही इससे प्रभावित हो रहे हैं और इसका सेवन गलती से कर जाते हैं तो यह आपकी गलतफहमी है। इंग्लैंड के शोधकर्ताओं ने एक स्टडी की, जिसमें यह सामने आया कि एक इंसान औसतन हर साल 70 हजार माइक्रोप्लास्टिक का सेवन कर जाता है। प्लास्टिक के प्रयोग को न के बराबर कर के हम इस संकट से बच सकते हैं। इसी उद्देश्य से प्रधानमंत्री ने सिंगल यूज़ प्लास्टिक को बंद करने का फैसला लिया है। आप प्लास्टिक स्ट्रॉ की जगह पेपर के बने स्ट्रॉ, प्लास्टिक की पानी के बोतलों की जगह शीशा, धातु, कॉपर और सेरामिक की बनी बोतलें, प्लास्टिक के कप के स्थान पर पेपर की प्याली या दोबारा इस्तेमाल होने वाले कप, प्लास्टिक की थैली की जगह जूट या कागज की बनी थैली का इस्तेमाल कर सकते हैं।