बेंगलुरु में विपक्ष जुटा…दिल्ली में NDA डटा, कौन कमजोर और कौन मजबूत!

लोकसभा चुनाव में अभी एक साल से कम का समय बचा है। लेकिन पक्ष और विपक्ष चुनावी समर के लिए बिसात बिछाने में जुट गया। बेंगलुरु में आज कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की अगुवाई में विपक्षी पार्टियों का महाजुटान हो रहा है।
नितिन उपाध्याय

आम चुनाव 2024 को लेकर सियासी दलों ने बिसात बिछानी शुरू कर दी है। दिल्ली से लेकर बेंगलुरु तक सियासी मोहरों की तैनाती पर मंथन हो रहा है। एक तरफ बेंगलुरु में विपक्षी दलों का जमावड़ा लगा है तो दिल्ली में सत्ताधारी एनडीए ने भी अपने सहयोगियों को बैठक के लिए न्योता दिया है।

लोकसभा चुनाव में अभी एक साल से कम का समय बचा है। लेकिन पक्ष और विपक्ष चुनावी समर के लिए बिसात बिछाने में जुट गया। बेंगलुरु में आज कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की अगुवाई में विपक्षी पार्टियों का महाजुटान हो रहा है। इस महाजुटान में 26 सियासी दल शामिल है। कर्नाटक के सीएम सिद्धारमैया डिनर का आयोजन करने जा रहे हैं। जिसमें सभी पार्टियां शामिल होगी।

हालांकि, आधिकारिक रुप से महाबैठक 18 जुलाई को आयोजित होगी। इस बैठक में विपक्ष के कॉमन मिनिमम प्रोग्राम को तय किया जा सकता है। इसके अलावा साझा प्रत्याशी, रैलियां, सीट आवंटन और अन्य मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। विपक्ष का कहना है कि यह तानाशाही के खिलाफ एकजुटता है और हम लोकतंत्र को बचाने के लिए एक मंच पर इकट्ठा हुए हैं।

गौरतलब है कि, इससे पहले साल 2014 और 2019 के आम चुनाव में बीजेपी महागठबंधन पर भारी रही है। विपक्षी मुद्दे बीजेपी की रणनीति के सामने पानी भरते नजर आए। दोनों चुनाव में बीजेपी ने विपक्षी एकता को पटकनी दी। इस बार महागठबंधन किन मुद्दों को लक्षित करके आगे बढ़ेगा इसकी रणनीति तैयार की जा रही है। बताया जा रहा है कि विपक्ष एक समिति का गठन करने जा रहा है और यह कॉमन मिनिमम प्रोग्राम को देखने का काम करेगी।

विपक्षी महाजुटान के बीच दिल्ली में एनडीए ने भी अपना कुनबा इकट्ठा किया है। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने अपने सहयोगियों को आमंत्रित भेजा है। 18 जुलाई मंगलवार को एनडीए दिल्ली में बैठक को आयोजित करने जा रही है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि दोनों बैठकों में कौन मजबूत और कौन कमजोर नजर आ रहा है। पहले बात विपक्षी महागठबंधन की करते हैं। इस गठबंधन को मजबूती मिली है और 10 अन्य दल शामिल हो गए। रविवार को केजरीवाल की अगुवाई वाली आम आदमी पार्टी ने भी साथ आने का ऐलान कर दिया।

इसके अलावा यूपी विधानसभा चुनाव 2022 में अपना खोया जनाधार पा चुकी क्षेत्रीय पार्टी रालोद भी साथ आई है। रालोद मुखिया जयंत चौधरी भी आम चुनाव में वेस्ट यूपी में अपना दबदबा दिखाएंगे। अगर कर्नाटक की बात करें तो जेडीएस ने विपक्ष के साथ आने से इंकार कर दिया। जेडीएस का कहना है कि विपक्षी एकता ने कभी हमें अपना नहीं माना।

अगर बात एनडीए की करें तो एनडीए भी लगातार अपना कुनबा बढ़ा रही है। बीजेपी के नेतृत्व वाली एनडीए को जीतनराम मांझी, चिराग पासवान और पूर्वी उत्तर प्रदेश से दारा सिंह चौहान का साथ मिल चुका है। महाराष्ट्र में भी बीजेपी ने अपने मजबूत पैर पसारे हैं। शिवसेना और एनसीपी को दो फाड़ कर एकनाथ शिंदे और अजित पवार को सत्ता में शामिल किया। इस बार महाराष्ट्र में बीजेपी काफी मजबूत नजर आ रही है। लेकिन पंजाब में बीजेपी को झटका लगा है। एनडीए के पुरानी साथी अकाली दल ने साथ आने मना कर दिया। बिहार और पंजाब में एनडीए इस बार कैसी सियासी घेराबंदी करती है यह देखने वाली बात होगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *