आप शॉपिंग करने, एटीएम से नगदी निकालने अथवा ऑनलाइन भुगतान करने के लिए डेबिट कार्ड या क्रेडिट कार्ड का प्रयोग करते होंगे. आपने उन कार्डों पर मास्टर,वीसा एवं रुपे लिखा देखा होगा. आपने यह जरूर सोचा होगा कि इनका क्या मतलब होता है.
अगर आप जानना चाहते हैं कि इन कार्डों पर मास्टर, वीजा, अथवा रुपे क्यों लिखा होता है, इन सबके बीच क्या अंतर होता है. आपके लिए कौन-सा कार्ड फायदे मंद है. इनकी शुरुआत.कैसे हुई.
तो हमारा यह पूरा लेख पढ़िए
जब आप किसी दुकान अथवा मॉल में जाते हैं और वहाँ से सामान खरीदने के बाद कार्ड से भुगतान करते हैं, तब एक मशीन में कार्ड लगाकर भुगतान कर दिया जाता है. जिस मशीन के द्वारा आपके कार्ड को जोड़कर इस्तमाल किया जाता है, उसको POS (पाँइंट ऑफ सेल) मशीन कहा जाता है.
इस पोस मशीन से भुगतान करने पर आपको यह नहीं पता होता कि दुकानदार का खाता किस बैंक में है. वह आपका कार्ड मशीन से जोड़ता है और आपसे मशीन में अपना पासवर्ड डालने को कहता है, पासवर्ड डालने के बाद भुगतान हो जाता है.
इस पेमेंट को करने के लिए वीसा, मास्टर अथवा रुपे जैसी कंपनियों का मुख्य योगदान रहता है. आपके कार्ड पर इनमें से कोई एक नाम अवश्य लिखा होता है.
ये तीनों बहुराष्ट्रीय वित्तीय सेवाएं(Multinational Financial Services) देने वाली कंपनीयां हैं. इनका मुख्य काम अपने कार्डधारकों एवं उपभोक्ताओं के धन को दुनिया के किसी भी बैंक से किसी भी बैंक में स्थानांतरित करवाने का होता है.
इन कंपनियों के सभी बैंको से समझौते हैं, जिनके अनुसार ये कंपनियां संबंधित बैंक का नेटवर्क एक्सेस कर सकती हैं. इसी आधार पर ये कंपनियां सीधे तौर से एक खाते से दूसरे खाते में धन स्थानांतरित करने की सेवा दे पाती हैं.
इन्ही कंपनियों के चलते आप किसी दूसरी बैंक का कार्ड होते हुए भी किसी अन्य बैंक के एटीएम से पैसे निकाल पाने में सक्षम हैं. किसी दुकान से सामान खरीद कर कार्ड से पेमेंट करने अथवा ऑनलाइन खरीददारी करके कार्ड द्वारा भुगतान करने में इन कंपनीयों की ही सहभागिता होती है.
तकनीकी विकास कैसे हुआ
मास्टर कार्ड-
मास्टर कार्ड कंपनी की शुरुआत सन् 1966 ई. में हुई. कैलिफ़ोर्निया के चार बैंकों व़ेल्स फ़ार्गो, क्रॉकर नेशनल बैंक, युनाइटेड कैलिफ़ोर्निया बैंक और बैंक ऑफ़ कैलिफ़ोर्निया नेमिलकर एक इंटरबैंक कार्ड बनाया जिसका नाम बैंक अमेरिका कार्ड रखा. इस कार्ड का प्रमुख काम इन चारो बैंकों के उपभोक्ताओं के लिए इंटर-बैंकिंग अर्थात एक बैंक से दूसरी बैंक के बीच लैन-दैन करने का होता था. सन् 1966 में ही इस बैंक समूह ने न्यूयॉर्क की मरीन मिडलैंड बैंक के साथ मिलकर एक इंटरबैंक कार्ड एसोसिएशन (ICA) बनाया, जिसे मास्टर चार्ज: द इंटरबैंक कार्ड नाम दिया गया. कुछ ही समय बाद फस्ट नेशनल सिटी बैंक इस एसोसिएशन का हिस्सा बन गई और अपने एवरीथिंग कार्ड को मास्टर चार्ज कार्ड के साथ मिला दिया. एक साल बाद सन् 1968 में इस कार्ड को यूरोप की इसी तरह का काम करने वाली कंपनी यूरोकार्ड (Eurocard) के साथ मिलकर यूरोपीय बाज़ार में पहुंचाया, जिससे यूरोप की बैंकों के उपभोक्ता भी इस कंपनी को आसानी से मिल गये. यूरोप में व्यवसाय शुरू करने के दस वर्ष के बाद सन् 1979 ई. में इस कार्ड का नाम बदल कर मास्टर कार्ड कर दिया गया. सन् 1997 ई. में मास्टर कार्ड ने एक्सेस नामक एक अन्य कार्ड ब्रांड को अपने अधिकार में ले लिया. सन् 2006 ई. के मध्य में कंपनी को सार्वजनिक रूप से वैश्विक पटल पर उतारा गया. अभी यह लगभग 160 देशों में वित्तीय सेवांए प्रदान कर रही है, जैसे- डेबिट कार्ड के लिए मास्टर कार्ड के नाम से साथ ही क्रेडिट कार्ड के लिए सिरस कार्ड के नाम से सेवाएं प्रदान करती है.
वर्तमान मेंयह कंपनी अमेरिकन बहुराष्ट्रीय वित्तीय सेवा निगम (multinational financial services corporation) के अंतर्गत आती है, जिसका मुख्यालय न्यूयॉर्क में है.
वीजा कार्ड-
वीजा कार्ड भी मास्टर कार्ड की तरह ही बहुराष्ट्रीय वित्तीय सेवा (multinational financial service) देने वाली कंपनी है. इसकी शुरुआत सितंबर 1958 के मध्य में हुई, जिसे बैंक ऑफ अमेरिका (BOA) ने कैलिफोर्निया के फ्रेस्नो सिटी में शुरू किया. बैंक ऑफ अमेरिका भी मास्टर कार्ड कंपनी से पहले बने इंटरबैंक कार्ड एसोसिएशन का हिस्सा थी. बैंक ऑफ अमेरिका ने 60,000 उपभोक्ताों के लिए अवांछित क्रेडिट कार्डों की शुरुआत बैंकअमेरिकार्ड के क्रेडिट कार्ड द्वारा की जिसको चार्जेक्स: क्रेडिटकार्ड नाम से को जारी किया गया था. सन् 1968 ई. से सन् 1977 ई. तक कनाडा बैंकों के गठबंधन (टोरंटो-डोमिनियन बैंक, कैनेडियन इम्पीरियल बैंक ऑफ कॉमर्स, रॉयल बैंक ऑफ कनाडा, बैन कैनेडियन नेशनल और बैंक ऑफ नोवा स्कोटिया सहित) ने इसे स्वीकृति प्रदांन की. सन् 1976 ई. में ही अंतरराष्ट्रीय बैंक अमेरिकार्ड प्रबंधन बहुराष्ट्रीय सदस्य निगम आई.बी.ए.एन.सी.ओ (IBANCO) के निर्देशकों ने यह प्रस्ताव रखा कि विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय नेटवर्कों को एक साथ एक ही नेटवर्क में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लाने की आवश्यकता है. जिसे एक ही नाम के साथ लाना निगम के लिए हितकारी होगा. इस प्रस्ताव को सन् 1975 ई. में आई.बी.ए.एन.सी.ओ सहित कनाडा बैंकों के गठबंधन ने भी स्वीकृति दे दी. इस प्रस्ताव के बाद पहले से चल रहे सभी कार्ड जैसे: बैंकअमेरिकार्ड, चार्जेक्स, बार्क्लेकार्ड, कार्टे ब्लू आदि सभी का लाइसेंसी नाम वीज़ा के तहत एकजुट हो गया.
वर्तमान में दुनियां भर में सबसे अधिक वीज़ा ब्रांड युक्त क्रेडिट कार्डों और डेबिट कार्डों का प्रयोग करने वाले उपभोक्ता हैं. वीज़ा न तो कार्ड जारी करती है, न ऋण देती है और न ही उपभोक्ताओं के लिए दरों और शुल्कों का निर्धारण करती है, बल्कि वीज़ा वित्तीय संस्थाओं को वीज़ा ब्रांड के भुगतान संबंधी उत्पाद प्रदान करती है. जिसका उपयोग वे अपने ग्राहकों को क्रेडिट, डेबिट, प्रीपेड और नकदी की प्राप्ति संबंधी सेवाएं प्रदान करने में करते हैं. इस कंपनी का मुख्यालय फ्रेस्नो सिटी, कैलिफोर्निया, संयुक्त राज्य अमेरिका में है.
रुपे कार्ड-
रुपे कार्ड भी मास्टर और वीसा कार्ड की तरह अंतः अधिकोष स्थानांतरण सुविधा प्रदान करता है. जहां मास्टर तथा वीसा इंटरनेशनल सेवा देती है वहीं रुपे अभी सिर्फ डोमेस्टिक सर्विस तक ही सीमित है, अर्थात यह कार्ड अभी सिर्फ भारत में ही उपयोग किया जाता है. सन् 2009 ई. के विज़न डॉक्युमेंट में भारतीय रिज़र्व बैंक ने भारत के लिए एक स्वदेशी कार्ड स्थापित करने की संभावनाओं पर विचार किया था. भारतीय रिज़र्व बैंक की परिकल्पना के अनुसार ही रुपे कार्ड को प्रायोगिक तौर पर जारी करने के लिएभारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एन.पी.सी.आई) को अधिकृत किया गया.
एन.पी.सी.आईने भारत में होने वाले लेन-देन को सुरक्षित और तेज़ बनाने के लिए 14 मई 2011 को महाराष्ट्र के शहरी सहकारी क्षेत्र के गोपीनाथ पाटिल पर्सिक जनता सहकारी बैंक के साथ पहला रुपे कार्ड जारी किया.
रुपे वीजा और मास्टर कार्ड्स के बीच अंतर-
प्रोसेसिंग फी:
वीजा, मास्टरकार्ड के मुकाबले रुपे कार्ड ट्रांजैक्शन शुल्क काफी कम लेता है।उदाहरण के तौर पर:अगर व्यक्ति 2,000 का भुगतान करता है, तो रुपे कार्ड के इस्तेमाल पर बैंक पेमेंट गेटवे को 2.50 रुपये का शुल्क देगा, वहीं, वीजा या मास्टर कार्ड इस्तेमाल करने पर बैंक को 3.25 रुपये का शुल्क देना होता है। यह शुल्क भारत में भुगतान करने पर ही वैध है।
तेजी से लेनदेन:
भारत में भुगतान करने पर रुपे कार्ड दूसरे कार्ड्स के मुकाबले ज्यादा तेजी से काम करता है।
अंतरराष्ट्रीय स्वीकार्यता:
फिलहाल रूपे कार्ड को इंटरनेशनल लेवल पर नहीं स्वीकारा जाता है। जबकि वीजा और मास्टर कार्ड कई सालों से इस मार्किट में हैं। वीजा और मास्टर कार्ड से ऑनलाइन पेमेंट आसानी से की जा सकती है। नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया यानि एनपीसीआई रुपे कार्ड के इंटरनेशनल लेवल पर स्वीकार किए जाने पर काम कर रहा है।
तिमाही शुल्क:
वीजा और मास्टर कार्ड के लिए ग्राहक को तिमाही शुल्क देना होता है, जबकि रुपे में किसी तरह का कोई शुल्क नहीं है।
कार्ड का प्रकार:
रूपे फिलहाल डेबिट कार्ड में ही उपलब्ध है, जबकि वीजा और मास्टर कार्ड डेबिट और क्रेडिट कार्ड में उपलब्ध है।
प्रवेश शुल्क:
बैंकों को इंटरनेशनल कार्ड के लिए प्रवेश शुल्क देना होता है। वहीं, रूप कार्ड के लिए किसी तरह का प्रवेश शुल्क नहीं है।