पीएम मोदी ने पुतिन को गिफ्ट की 1330 दोहों वाली ‘तिरुक्कुरल’, रूस से क्या है इसका कनेक्शन?

PM Modi gifted Putin ‘Tirukkural: नई दिल्ली में 18वें BRICS शिखर सम्मेलन से इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की। इस दौरान पीएम मोदी ने उन्हें प्राचीन तमिल क्लासिक ‘तिरुक्कुरल’ का रूसी अनुवाद भेंट किया। कवि और दार्शनिक तिरुवल्लुवर की यह प्रसिद्ध रचना 133 अध्यायों में विभाजित 1,330 दोहों का संग्रह है। किताब भेंट करते हुए पीएम मोदी ने उम्मीद जताई कि यह रूस के पाठकों को प्रेरित करने के साथ दोनों देशों के लोगों के बीच संबंधों को और मजबूत करने में मदद करेगी।

क्या है ‘तिरुक्कुरल’?

‘तिरुक्कुरल’ को महान तमिल कवि और दार्शनिक तिरुवल्लुवर की प्रमुख कृतियों में गिना जाता है। इसमें जीवन, नैतिकता, शासन, समाज और मानवीय रिश्तों से जुड़े विचारों को दोहों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है। यह पूरी रचना तीन प्रमुख विषयों में विभाजित है।

पहला हिस्सा अरम (धर्म) है, जिसमें शुरुआती 38 अध्याय सदाचार, कर्तव्य, गृहस्थ जीवन और सही आचरण से जुड़े हैं। दूसरा हिस्सा पोरुल (अर्थ) है, जिसमें अध्याय 39 से 108 तक समाज, अर्थव्यवस्था, राजनीति, राज्य संचालन और शासन जैसे विषय शामिल हैं। अंतिम हिस्सा इन्बम (काम) है, जिसमें 25 अध्याय प्रेम, स्नेह और रिश्तों की चर्चा करते हैं।

माना जाता है कि ‘तिरुक्कुरल’ की रचना 300 ईसा पूर्व से 500 ईस्वी के बीच हुई थी। शास्त्रीय तमिल साहित्य की यह प्रभावशाली रचना नैतिकता, शासन और मानवीय संबंधों से जुड़े विचारों के कारण तमिलनाडु से बाहर भी लोकप्रिय हुई और इसका कई भाषाओं में अनुवाद किया गया है।

रूसी भाषा में किसने किया अनुवाद?

पीएम मोदी ने पुतिन को जिस किताब की प्रति भेंट की, उसका प्रकाशन सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ क्लासिकल तमिल ने किया है। इसका रूसी भाषा में अनुवाद नायरा म्क्रतचियन ने किया है। यह पुस्तक उस समय भेंट की गई, जब मोदी और पुतिन नई दिल्ली में BRICS शिखर सम्मेलन से इतर द्विपक्षीय वार्ता के लिए मिले।

तिरुक्कुरल का रूस से क्या कनेक्शन?

भारतीय दर्शन और साहित्य में रूसी रुचि का इतिहास काफी पुराना माना जाता है। यूरोपीय भाषाओं में हुए अनुवादों के जरिए ‘तिरुक्कुरल’ रूसी विद्वानों और साहित्यकारों तक भी पहुंचा। रूस के प्रसिद्ध लेखक लियो टॉल्स्टॉय का भी 19वीं सदी में इसके शुरुआती अनुवादों के जरिए इस रचना से परिचय होने की बात कही जाती है।

कहा जाता है कि ‘तिरुक्कुरल’ में सदाचार, करुणा और अहिंसा पर दिए गए जोर ने टॉल्स्टॉय के दार्शनिक लेखन को प्रभावित किया। टॉल्स्टॉय और महात्मा गांधी के बीच 20वीं सदी की शुरुआत में हुए पत्राचार को भी कुछ विवरण ‘तिरुक्कुरल’ से जोड़ते हैं। कुछ दावों के मुताबिक, टॉल्स्टॉय ने गांधी को इस ग्रंथ को पढ़ने की सलाह दी थी और इसकी शिक्षाओं ने अहिंसा को लेकर उनके विचारों को प्रभावित किया। ऐसे में पुतिन को ‘तिरुक्कुरल’ का रूसी संस्करण भेंट करना भारत और रूस के बीच पुराने साहित्यिक जुड़ाव को मौजूदा द्विपक्षीय संबंधों से जोड़ने वाला कदम माना गया।

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