Partition Horrors Remembrance Day: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 14 अगस्त को लखनऊ में आयोजित विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस कार्यक्रम में 1947 के विभाजन को लेकर कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि देश के विभाजन की कीमत आज भी भारत और उसके निर्दोष नागरिक चुका रहे हैं। सीएम योगी ने कहा कि हमें इतिहास से सीख लेकर आपस में बंटने की गलती नहीं करनी चाहिए।
‘क्रांतिकारियों को भुला दिया गया’
सीएम योगी ने कहा कि जिन क्रांतिकारियों ने देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया, उन्हें भुला दिया गया। वहीं, जिन लोगों ने अपने स्वार्थ और सत्ता की लालसा में देश का विभाजन कराया, वे सर्वेसर्वा बन गए। उन्होंने कहा कि देश की कई संस्थाओं के नाम तक एक परिवार और उसके खानदान के नाम पर रख दिए गए।
मुख्यमंत्री ने 1947 के विभाजन को मानवता के इतिहास के सबसे काले अध्यायों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि विभाजन के दौरान करोड़ों हिंदुओं को अपनी ही मातृभूमि और जन्मभूमि से विस्थापित होना पड़ा। लाखों लोगों ने जान गंवाई और परिवार उजड़ गए।
‘विभाजन की कीमत आज भी चुका रहा भारत’
सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि विभाजन दिवस केवल अतीत को याद करने का अवसर नहीं है, बल्कि इससे सबक लेने का दिन भी है। उन्होंने सवाल उठाया कि विभाजन की स्थिति क्यों पैदा हुई, इसके लिए कौन जिम्मेदार था और दोषियों को कितनी सजा मिली? उन्होंने कहा कि इन सवालों पर आज भी विचार करने की जरूरत है।
सीएम योगी ने कहा कि विभाजन की कीमत भारत को लगातार चुकानी पड़ रही है। आतंकवाद, नक्सलवाद, माओवाद और उग्रवाद जैसी चुनौतियों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इनका असर आज भी देश के सामने है।
CAA को लेकर भी कांग्रेस पर निशाना
मुख्यमंत्री ने नागरिकता संशोधन कानून (CAA) का जिक्र करते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कानून में पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई शरणार्थियों को नागरिकता देने का प्रावधान किया गया था।
सीएम योगी ने कहा कि CAA में किसी की जमीन लेने या किसी समुदाय के अधिकार छीनने का प्रावधान नहीं था। इसके बावजूद इसके विरोध में आंदोलन और हिंसा के प्रयास हुए। उन्होंने लखनऊ समेत कानपुर, मेरठ, संभल, अलीगढ़, बुलंदशहर, मुजफ्फरनगर और सहारनपुर में हुए विरोध प्रदर्शनों का भी जिक्र किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि विभाजन की त्रासदी हमें यह सिखाती है कि देश की एकता और सामाजिक सद्भाव को बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने लोगों से इतिहास से सीख लेने और भविष्य में आपसी विभाजन की स्थिति पैदा न होने देने का आह्वान किया।