नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को एक वीडियो संदेश के माध्यम से महत्वपूर्ण घोषणा की। उन्होंने बताया कि देश की परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार लाने के उद्देश्य से इंफोसिस के सह-संस्थापक और आधार परियोजना के प्रमुख वास्तुकार नंदन नीलेकानी की अध्यक्षता में एक हाई पावर्ड टास्क फोर्स का गठन किया गया है।
इस टास्क फोर्स का मुख्य उद्देश्य सार्वजनिक परीक्षाओं को लीक-प्रूफ, अधिक पारदर्शी, विश्वसनीय और तकनीक-आधारित बनाना है। टास्क फोर्स के अन्य प्रमुख सदस्यों में पूर्व इसरो प्रमुख एस. सोमनाथ, इंटेलिजेंस ब्यूरो निदेशक तपन डेका, आईआईटी मद्रास निदेशक वी. कामाकोटी, पूर्व स्कूल शिक्षा सचिव अनीता करवाल और उच्च शिक्षा सचिव अमृत लाल मीना शामिल हैं।
नंदन नीलेकानी का चयन इसलिए किया गया, क्योंकि वे डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर बनाने में गहरी विशेषज्ञता रखते हैं। आधार और यूपीआई जैसी सफल पहलों में उनकी निर्णायक भूमिका रही है। यह कदम हाल के महीनों में NEET सहित विभिन्न प्रवेश और भर्ती परीक्षाओं में बार-बार हुई पेपर लीक घटनाओं, छात्रों के व्यापक प्रदर्शन (जिनमें कॉक्रोच जनता पार्टी के बैनर तले हुए प्रदर्शन शामिल हैं) और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवालों की पृष्ठभूमि में उठाया गया है। इससे पहले सरकार ने फास्ट-ट्रैक कोर्ट गठित करने, पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट में सख्ती बढ़ाने, NTA के 47 अधिकारियों को हटाने और पूरी प्रणाली के ओवरहॉल की घोषणाएं की थीं। सुप्रीम कोर्ट भी इन सुधारों की नजदीकी निगरानी कर रहा है।
परीक्षा सुधारों की दिशा में बड़ा कदम
प्रधानमंत्री ने युवाओं के भविष्य की सुरक्षा को सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए कहा कि टास्क फोर्स तकनीक, साइबर सुरक्षा, डिजिटल सिस्टम और बड़े पैमाने पर विश्वसनीय परीक्षा संचालन पर विशेष ध्यान देगी। उम्मीद है कि इससे छात्रों का विश्वास बहाल होगा और परीक्षा व्यवस्था को मजबूती मिलेगी। यह घोषणा परीक्षा सुधारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण और दूरगामी कदम माना जा रहा है।