Iran US War: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान युद्ध मामले में पाकिस्तान को बुरी तरह फँसा दिया है। बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अगर खाड़ी देश और पाकिस्तान समेत कुछ मुस्लिम देश Abraham Accords (इब्राहिम समझौते) पर साइन नहीं करते, तो वे ईरान के साथ शांति समझौता नहीं करेंगे।
Abraham Accords क्या है?
यह 2020 में ट्रंप के पहले कार्यकाल में शुरू हुआ समझौता है, जिसमें UAE, बहरीन , मोरक्को , सूडान आदि देशों ने इजराइल के साथ राजनयिक संबंध सामान्य कर लिए। इसका मकसद मध्य पूर्व में इजराइल-अरब देशों के बीच शांति और आर्थिक सहयोग बढ़ाना था। अब ट्रंप इसे और बड़ा करना चाहते हैं।
ट्रंप का नया दांव
अभी अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध चल रहा है, जिसमें हमले, Strait of Hormuz ब्लॉकेज और तेल संकट हुआ। ट्रंप अब ईरान के साथ सीजफायर की कोशिश कर रहे हैं। विशेष दूत स्टीव विटकॉफ़ और ज़रेड कुश्नर (ट्रंप के दामाद) इस पर काम कर रहे हैं।
पाकिस्तान के सामने कठिन शर्त
ट्रंप ने सऊदी अरब, कतर, पाकिस्तान, तुर्की, मिस्र, जॉर्डन आदि देशों के नेताओं से फोन पर बात की। उन्होंने कहा कि ईरान डील का हिस्सा यह होना चाहिए कि ये देश इजराइल के साथ संबंध सामान्य करें। उन्होंने ट्रुथ सोशल पर लिखा कि सऊदी और कतर को तुरंत साइन करना चाहिए, बाकी फॉलो करें। अगर नहीं करते तो “बैड इंटेंशन ” दिखाएगा और डील आगे नहीं बढ़ेगी। ट्रंप के इस दांव में पाकिस्तान बहुत बुरा फँस गया है।
ट्रंप का क्या है बयान
ये देश अमेरिका के एहसान पर हैं, क्योंकि अमेरिका मध्य पूर्व में स्थिरता ला रहा है। ट्रंप चाहते हैं कि ईरान डील के साथ-साथ बड़ा क्षेत्रीय गठबंधन बने, जिसमें ईरान भी बाद में शामिल हो सके।
चुनौतियां:
- सऊदी अरब लंबे समय से कहता आया है कि बिना फिलिस्तीन राज्य के इजराइल से नॉर्मलाइज़ेशन नहीं होगा।
- पाकिस्तान जैसे देश इस्लामिक भावनाओं और घरेलू राजनीति के कारण मना कर सकते हैं।
- तुर्की पहले से इजराइल को मान्यता देता है लेकिन संबंध तनावपूर्ण हैं।
- कई देशों में जनता और विपक्षी इस प्रस्ताव का विरोध कर रहे हैं। कुछ इसे ट्रंप की “बड़ी बात” मान रहे हैं, जो असल deal में शामिल नहीं होगी।
यह ट्रंप की कूटनीति है
ईरान डील को लेवरेज बनाकर अब्राहम एकॉर्ड्स को विस्तार देना। इससे मध्य पूर्व का नक्शा बदल सकता है, लेकिन व्यावहारिक रूप से बहुत मुश्किल है क्योंकि फिलिस्तीन मुद्दा, ईरान का न्यूक्लियर प्रोग्राम और क्षेत्रीय तनाव बरकरार हैं।कुल मिलाकर, ट्रंप इजराइल को मजबूत करने और अपना पहला टर्म का लीगेसी बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन क्षेत्रीय देशों की प्रतिक्रिया अभी चुप्पी या विरोध वाली है।