S जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से की बात, पश्चिम एशिया संकट पर हुई चर्चा

India US talks West Asia crisis: (नई दिल्ली): पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और उससे उत्पन्न वैश्विक चिंताओं के बीच भारत और अमेरिका के बीच कूटनीतिक स्तर पर महत्वपूर्ण बातचीत हुई है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोमवार को अपने अमेरिकी समकक्ष मार्को रुबियो से फोन पर चर्चा की। इस दौरान दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय हालात, वैश्विक अर्थव्यवस्था पर प्रभाव और ऊर्जा सुरक्षा जैसे मुद्दों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया।

पश्चिम एशिया संघर्ष पर केंद्रित चर्चा

विदेश मंत्री जयशंकर ने सोशल मीडिया पर जानकारी देते हुए कहा कि उनकी और रुबियो के बीच विस्तृत बातचीत हुई, जिसमें मुख्य रूप से पश्चिम एशिया के मौजूदा संकट पर चर्चा की गई। उन्होंने बताया कि दोनों पक्षों ने अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभावों और विशेष रूप से ऊर्जा आपूर्ति को लेकर उत्पन्न चिंताओं पर विचार साझा किए। दोनों देशों ने भविष्य में भी संपर्क बनाए रखने पर सहमति जताई।

अमेरिकी विदेश मंत्रालय का बयान

अमेरिकी विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान के अनुसार, मार्को रुबियो और एस. जयशंकर ने आपसी प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने के लिए मिलकर काम जारी रखने की प्रतिबद्धता दोहराई। मंत्रालय के प्रधान उप प्रवक्ता टॉमी पिगोट ने कहा कि दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया की स्थिति पर गंभीरता से चर्चा की और क्षेत्रीय स्थिरता की आवश्यकता पर जोर दिया।

ट्रंप के फैसले के बाद बढ़ी हलचल

यह बातचीत ऐसे समय में हुई जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने के लिए दी गई समयसीमा को पांच दिनों के लिए बढ़ा दिया। इस फैसले के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई है और कई देशों ने अपनी चिंताएं व्यक्त की हैं।

जीसीसी देशों के राजदूतों से मुलाकात

पश्चिम एशिया की स्थिति को लेकर जयशंकर ने खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) के सदस्य देशों-सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, ओमान, कतर, बहरीन और कुवैत के राजदूतों से भी मुलाकात की। इस बैठक में क्षेत्रीय हालात और भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर संभावित प्रभावों पर चर्चा की गई। जयशंकर ने भारतीय समुदाय को निरंतर समर्थन देने के लिए इन देशों का आभार भी जताया।

ऊर्जा आपूर्ति पर गहराता संकट

ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को आंशिक रूप से अवरुद्ध किए जाने के बाद वैश्विक तेल और गैस की कीमतों में तेज उछाल देखा गया है। यह जलडमरूमध्य विश्व की लगभग 20 प्रतिशत तेल और एलएनजी आपूर्ति का प्रमुख मार्ग है, जिससे इसकी रणनीतिक अहमियत और बढ़ जाती है। भारत जैसे ऊर्जा आयातक देशों के लिए यह स्थिति विशेष चिंता का विषय बनी हुई है।

श्रीलंका से भी की बातचीत

इस घटनाक्रम के बीच जयशंकर ने श्रीलंका की विदेश मंत्री विजेता हेराथ से भी बातचीत की। उन्होंने कहा कि भारत ‘पड़ोसी प्रथम’ और ‘विजन महासागर’ नीति के तहत क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है और मौजूदा संकट के प्रभावों से निपटने के लिए साझेदारी जारी रखेगा।

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