(नई दिल्ली): राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) ने मुफ्त अरबी कक्षाओं की आड़ में युवाओं को आतंकी गतिविधियों के लिए कट्टरपंथी बनाने से जुड़े एक मामले में सात आरोपियों और एक पंजीकृत सोसाइटी के खिलाफ शुक्रवार को पूरक आरोपपत्र दाखिल किया। यह मामला वर्ष 2023 का है और इसकी जांच अक्टूबर 2022 के कोयंबटूर कार बम धमाके के सिलसिले में सामने आई थी।
मुफ्त अरबी कक्षाओं की आड़ में कट्टरता
एनआईए के अनुसार, आरोपी युवाओं को मुफ्त अरबी शिक्षा देने के बहाने कट्टरपंथी विचारधारा की ओर आकर्षित कर रहे थे और बाद में उन्हें आतंकी गतिविधियों के लिए तैयार किया जा रहा था। जांच में सामने आया कि यह नेटवर्क आईएसआईएस से प्रेरित था।
ऑनलाइन मंचों का किया गया दुरुपयोग
जांच एजेंसी ने बताया कि आरोपी जूम और व्हाट्सएप जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से अरबी कक्षाएं संचालित कर रहे थे। इन कक्षाओं के जरिए कट्टरपंथी उपदेश और सामग्री साझा की जाती थी, जिससे युवाओं को उग्र विचारधारा की ओर ले जाया जा सके। एनआईए ने इससे पहले इस मामले में चार आरोपियों को नामजद किया था, जिनमें मद्रास अरबी कॉलेज के प्रिंसिपल जमील बाशा भी शामिल थे। ताजा पूरक आरोपपत्र में नामजद सात आरोपियों में जमील बाशा के कुछ छात्र भी शामिल हैं।
सोसाइटी पर भी आरोप
एनआईए ने आरोप लगाया है कि कोवई अरबी एजुकेशनल एसोसिएशन (केएईए) नामक पंजीकृत सोसाइटी का इस्तेमाल इस कट्टरता नेटवर्क को संचालित करने के लिए किया गया। एजेंसी का कहना है कि सोसाइटी की गतिविधियां युवाओं को उग्रवादी विचारधारा से जोड़ने में सहायक थीं। एनआईए ने कहा कि वह इस कट्टरता नेटवर्क को पूरी तरह समाप्त करने के लिए अपनी जांच जारी रखे हुए है और मामले से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी गहन जांच की जा रही है।