जयशंकर ने बिना नाम लिए अमेरिका पर बोला हमला, कहा- प्रतिभा प्रवाह रोकने वाले देश नुक़सान में रहेंगे

(नई दिल्ली): विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बुधवार को कहा कि सीमाओं के पार पेशेवरों और प्रतिभाओं की आवाजाही में अत्यधिक बाधाएं खड़ी करने वाले देश अंततः “कुल मिलाकर नुकसान” में रहेंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत को दुनिया के देशों को यह समझाने की आवश्यकता है कि ‘टैलेंट फ्लो’ पारस्परिक लाभ का साधन है, न कि प्रतिस्पर्धा का संकट।

गतिशीलता पर आयोजित एक सम्मेलन के संवादात्मक सत्र में जयशंकर ने यह टिप्पणी अमेरिकी ट्रंप प्रशासन की कड़ी आव्रजन नीतियों तथा एच-1बी वीज़ा पर नए शुल्क लागू किए जाने की पृष्ठभूमि में की। उन्होंने कहा कि यदि कोई देश उन्नत विनिर्माण (advanced manufacturing) के युग में प्रवेश करना चाहता है, तो उसे अधिक कुशल जनशक्ति की जरूरत होगी, और प्रतिबंध उसकी ही प्रगति को बाधित करेंगे।

“प्रतिभा का प्रवाह रोका तो काम जाएगा बाहर”

एच-1बी वीजा पर चिंताओं से जुड़े प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि यदि विकसित देशों में नौकरियों पर दबाव है, तो इसका कारण विदेशी पेशेवर नहीं, बल्कि वर्षों से विनिर्माण गतिविधियों का अन्य देशों में शिफ्ट होना है। उन्होंने कहा, “यदि लोगों के लिए यात्रा करना कठिन बनाया गया, तो काम वहीं नहीं रुकेगा वह बाहर चला जाएगा। उन्होंने बताया कि अमेरिका में एच-1बी वीज़ा की स्वीकृत आवेदनों में लगभग 71 प्रतिशत भारतीय होते हैं, जो यह दर्शाता है कि भारतीय पेशेवर वैश्विक तकनीकी और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र में केंद्रीय भूमिका निभाते हैं।

“विश्व व्यापार की तरह गतिशीलता भी संबंधों का अहम आयाम”

जयशंकर ने कहा कि वैश्वीकरण के इस दौर में दुनिया आर्थिक संबंधों को अक्सर ‘व्यापार’ तक सीमित करके देखती है, जबकि ‘वर्क मोबिलिटी’ इसका उतना ही महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने रेमिटेंस का उदाहरण देते हुए कहा कि पिछले वर्ष भारत को 135 अरब डॉलर का प्रेषण मिला, जो अमेरिका को भारत के निर्यात का लगभग दोगुना है।

अवैध आवाजाही पर चेतावनी

उन्होंने कानूनी गतिशीलता का समर्थन करते हुए अवैध आव्रजन की गंभीरता पर भी आगाह किया। जयशंकर ने कहा कि मानव तस्करी के नेटवर्क में अक्सर राजनीतिक और अलगाववादी एजेंडा वाले तत्व सक्रिय रहते हैं, जो इसे एक खतरनाक अपराध चक्र में बदल देते हैं। जयशंकर ने दोहराया कि भारत प्रतिभाओं के वैश्विक प्रवाह का समर्थन करता है और इसकी सुचारुता सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय साझेदारों से रचनात्मक संवाद जारी रखेगा।

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