Rare full Lunar eclipse in India: भारतवासियों को रविवार की रात दुर्लभ खगोलीय घटना पूर्ण चंद्रग्रहण का दीदार हुआ। लद्दाख से लेकर तमिलनाडु तक लोग रात के आसमान की ओर टकटकी लगाए खड़े रहे। हालांकि देश के कई हिस्सों में बादलों और बारिश ने इस दृश्य में खलल डाला। रात 9:57 बजे से पृथ्वी की छाया ने चंद्रमा को ढकना शुरू किया और 11:01 बजे वह पूरी तरह से ढक गया। इस दौरान चंद्रमा का रंग तांबे जैसा लाल हो गया। यह रंग पृथ्वी के वायुमंडल से होकर गुजरने वाली सूर्य की किरणों की वजह से दिखता है।
82 मिनट तक रहा पूर्ण ग्रहण
भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान (IIA) के स्कोप अनुभाग प्रमुख नीरुज मोहन रामानुजम ने बताया कि पूर्ण ग्रहण 11:01 बजे से 12:23 बजे तक, कुल 82 मिनट तक रहा। यह भारत में देखा गया 2022 के बाद सबसे लंबा पूर्ण चंद्रग्रहण था। पूर्व खगोल वैज्ञानिक बी.एस. शैलजा ने बताया कि चंद्रग्रहण के दौरान लालिमा का कारण पृथ्वी के वायुमंडल द्वारा सूर्य की रोशनी का अपवर्तन है।
देशभर में लोगों ने देखा लाइव प्रसारण
भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान ने बेंगलुरु, लद्दाख और तमिलनाडु में स्थित अपनी वेधशालाओं से इस खगोलीय घटना को दूरबीनों के माध्यम से देखा और सोशल मीडिया पर लाइव स्ट्रीमिंग के जरिए आम जनता तक पहुंचाया। जिन स्थानों पर बादलों के कारण दृश्य अवरुद्ध रहा, वहां लोगों ने इंटरनेट के माध्यम से ग्रहण का आनंद लिया। यह ग्रहण एशिया, यूरोप, अफ्रीका और पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के कुछ हिस्सों में भी दिखाई दिया।
विज्ञान बनाम अंधविश्वास
जहां एक ओर यह खगोलीय घटना विज्ञान प्रेमियों के लिए रोमांच का विषय रही, वहीं दूसरी ओर इससे जुड़े अंधविश्वास भी सामने आए। भारत में आज भी कई लोग ग्रहण के दौरान खाना, पानी और शारीरिक गतिविधियां रोक देते हैं, कुछ तो इसे गर्भवती महिलाओं के लिए हानिकारक भी मानते हैं। हालांकि वैज्ञानिकों का कहना है कि यह सिर्फ एक खगोलीय प्रक्रिया है और इससे मनुष्य या जानवर को कोई नुकसान नहीं होता।
ग्रहण के दौरान भोजन करना सुरक्षित या नहीं
रामानुजम ने साफ कहा, “ग्रहण के दौरान बाहर जाकर भोजन करना पूरी तरह सुरक्षित है। यह केवल एक प्राकृतिक घटना है। किसी भी तरह की नकारात्मक ऊर्जा से इसका कोई लेना-देना नहीं है।”
भारत में अगला पूर्ण चंद्रग्रहण 31 दिसंबर 2028 को दिखाई देगा। इससे पहले ऐसा संयोग 27 जुलाई 2018 को बना था जब देशभर से पूर्ण चंद्रग्रहण देखा गया था।