करगिल विजय दिवस पर सेना प्रमुख ने लॉन्च की 3 नई डिजिटल ऐप, जानें क्या है खासियत

Kargil Vijay Diwas: करगिल (द्रास): 26वें करगिल विजय दिवस के अवसर पर भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने शनिवार को तीन नई डिजिटल की शुरुआत ऐप की। इन ऐप के माध्यम से देशवासी 1999 के करगिल युद्ध के शहीदों को ऑनलाइन श्रद्धांजलि दे सकेंगे और युद्ध से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां डिजिटल रूप में प्राप्त कर सकेंगे।

सेना ने इस अवसर पर ‘ई-श्रद्धांजलि’ पोर्टल, क्यूआर कोड आधारित ‘ऑडियो गेटवे’ और ‘इंडस व्यूप्वाइंट’ ऐप लॉन्च किया है। ये परियोजनाएं सैनिकों के बलिदान और करगिल युद्ध की वीर गाथाओं को आम जनता तक पहुंचाने का नया माध्यम साबित होंगी।

ई-श्रद्धांजलि से शहीदों को करें नमन

ई-श्रद्धांजलि’ पोर्टल के जरिए देश के लोग बिना स्मारक स्थल पर जाए भी अपने वीर शहीदों को सम्मानित कर सकते हैं। यह सेवा विशेष रूप से उन लोगों के लिए है जो विभिन्न कारणों से स्मारक तक नहीं जा पाते। सेना के एक अधिकारी ने बताया कि यह पहल सैनिकों के त्याग और बलिदान को समझाने तथा उन्हें याद रखने के उद्देश्य से शुरू की गई है।

युद्ध की कहानियां सुनाएं ऑडियो गेटवे

क्यूआर कोड आधारित ‘ऑडियो गेटवे’ में करगिल युद्ध से जुड़ी वीर गाथाएं और लड़ी गई लड़ाइयों की कहानियां उपलब्ध हैं। इस सुविधा के जरिए लोग ईयरफोन लगाकर युद्ध की घटनाओं और सैनिकों के साहस के किस्से सुन सकते हैं, जैसे वे किसी संग्रहालय में हों। यह सेवा युद्ध के उस दौर की जीवंत तस्वीर पेश करती है, जो आम नागरिकों तक आसानी से पहुंच सके।

इंडस व्यूप्वाइंट ऐप से करें वर्चुअल यात्रा

‘इंडस व्यूप्वाइंट’ ऐप लोगों को बटालिक सेक्टर में नियंत्रण रेखा (एलओसी) तक आभासी यात्रा का मौका देता है। बटालिक करगिल युद्ध का एक अहम युद्धक्षेत्र रहा है, जो करीब 10,000 फुट की ऊंचाई पर स्थित है। इस ऐप के माध्यम से उपयोगकर्ता उस इलाके की वास्तविक स्थिति और वहां की परिस्थितियों को समझ सकेंगे, जहां सैनिक देश की सुरक्षा के लिए दिन-रात खड़े रहते हैं।

करगिल विजय दिवस का इतिहास

करगिल विजय दिवस हर साल 26 जुलाई को मनाया जाता है। 1999 में इसी दिन भारतीय सेना ने ऑपरेशन विजय के तहत तोलोलिंग, टाइगर हिल समेत करगिल की बर्फीली चोटियों से पाकिस्तानी घुसपैठियों को खदेड़कर भारत की सीमाओं की रक्षा की सफल घोषणा की थी। तीन महीने लंबी यह लड़ाई देशभक्ति और सैनिकों की बहादुरी का प्रतीक बनी।

इन डिजिटल परियोजनाओं से जनता को सैनिकों के बलिदान और उनके संघर्ष की गहराई समझने में मदद मिलेगी। यह पहल देशभक्ति की भावना को बढ़ावा देने और शहीदों को याद रखने का एक नया तरीका है। इस तरह करगिल विजय दिवस के 26वें साल पर शुरू की गई ये तकनीकी परियोजनाएं युद्ध के इतिहास को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी

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