Surajkund Diwali Mela: केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने आदिकवि महर्षि वाल्मीकि जी की जयंती के शुभ अवसर पर आयोजित तृतीय सूरजकुंड दिवाली मेले के समापन समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने इस आयोजन को हुनरमंद शिल्पकारों, कारीगरों और कलाकारों के लिए महत्वपूर्ण मंच बताया। मनोहर लाल ने कहा कि यह मेला उनकी रचनात्मकता को सम्मान देने और उनके उत्पादों को सीधे ग्राहकों तक पहुंचाने का माध्यम बनकर उभरा है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सूरजकुंड दिवाली मेले के माध्यम से अलग-अलग क्षेत्रों के शिल्पकारों, कारीगरों और कलाकारों को अपने हुनर और रचनात्मकता को सामने लाने का अवसर मिला है। उनके उत्पादों को सीधे ग्राहकों तक पहुंचाने से कलाकारों और कारीगरों को अपने काम की पहचान दिलाने में मदद मिलती है। यह आयोजन स्थानीय हुनर को सम्मान देने के साथ लोगों को उनके बनाए उत्पादों से जुड़ने का अवसर भी प्रदान करता है।
प्रस्तुतियों में दिखी ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की झलक
मनोहर लाल ने कहा कि विभिन्न प्रदेशों से आए अतिथि कलाकारों ने अपने योगदान और प्रस्तुतियों के माध्यम से ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की भावना को प्रदर्शित किया। अलग-अलग प्रदेशों के कलाकारों की भागीदारी ने मेले को विविधता और सांस्कृतिक एकता का साझा मंच बनाया।
उन्होंने कहा कि इस दिवाली मेले ने आत्मनिर्भरता, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक एकता को बढ़ावा देने वाले व्यापक आयोजन का रूप लिया। मेले में कलाकारों और कारीगरों की भागीदारी ने उनके हुनर को सम्मान देने के साथ उनके उत्पादों को लोगों तक पहुंचाने का अवसर उपलब्ध कराया।
हर घर स्वदेशी, घर-घर स्वदेशी’ का संदेश
केंद्रीय मंत्री ने लोगों से स्वदेशी के संकल्प को अपने जीवन का हिस्सा बनाने की अपील की। उन्होंने ‘हर घर स्वदेशी, घर-घर स्वदेशी’ और ‘गर्व से कहो, ये स्वदेशी है’ के मंत्र को अपनाने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि दीपावली के अवसर पर लोगों को स्थानीय कारीगरों के उत्पाद खरीदने चाहिए और उनके हुनर को प्रोत्साहन देना चाहिए। मनोहर लाल ने स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने का आह्वान करते हुए कहा कि स्थानीय कारीगरों के बनाए सामान को अपनाकर आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को मजबूत किया जा सकता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे दीपावली पर स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता दें और स्वदेशी को बढ़ावा देने में अपनी भूमिका निभाएं।