BRICS Summit 2026: नई दिल्ली में आयोजित BRICS समिट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को सदस्य देशों के सामने भारत का विजन रखा। उन्होंने कहा कि BRICS का संदेश स्पष्ट होना चाहिए और संगठन का उद्देश्य किसी के खिलाफ खड़ा होना नहीं, बल्कि सभी को साथ लेकर आगे बढ़ना है। पीएम मोदी ने कहा कि अगर भविष्य साझा है तो उसे आकार देने का अधिकार भी सभी का साझा होना चाहिए। उन्होंने आवाज से लेकर प्रभाव और विशेषाधिकार से साझेदारी तक BRICS के संकल्प को आगे बढ़ाने पर जोर दिया।
प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि BRICS के संयुक्त बयान पर सहमति बन गई है। उन्होंने सदस्य देशों से संगठन के कामकाज को और प्रभावी बनाने तथा आने वाले वर्षों के लिए बड़े एजेंडे पर काम करने का आह्वान किया।
‘ग्लोबल साउथ’ को बनना होगा नियम तय करने वाला
दो दिवसीय वार्षिक BRICS शिखर सम्मेलन की शुरुआत करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि मौजूदा वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए ग्लोबल साउथ को केवल नियमों का पालन करने वाला नहीं, बल्कि नियम तय करने वाला बनना होगा। उन्होंने कहा कि BRICS ने वैश्विक मंच पर अपनी अलग पहचान बनाई है और यह समूह किसी के खिलाफ नहीं है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि आज ग्लोबल साउथ वैश्विक संकटों के दौरान पहली पंक्ति में खड़ा है, लेकिन निर्णय लेने की प्रक्रिया में वह सबसे पीछे है। उन्होंने कहा कि इस स्थिति को बदलकर विशेषाधिकार के पिरामिड को साझेदारी के मंच में बदलने की जरूरत है। ऐसा मंच होना चाहिए, जहां हर देश की आवाज सुनी जाए, हर सदस्य की हिस्सेदारी हो और हर प्रयास का केंद्र मानवता का विकास हो।
अगले 20 साल के लिए नए एजेंडे पर जोर
पीएम मोदी ने कहा कि BRICS को अगले 20 वर्षों के लिए नए और बड़े लक्ष्य वाला एजेंडा तैयार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि इसकी शुरुआत संगठन के अंदरूनी कामकाज को बेहतर बनाने से होनी चाहिए। BRICS की अध्यक्षता भले ही हर साल बदलती है, लेकिन इसका असर संस्थागत कामकाज की गति पर नहीं पड़ना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने BRICS में निरंतरता और फैसलों के क्रियान्वयन के लिए एक व्यवस्था बनाने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि ट्रोइका व्यवस्था के जरिए सभी पहलों और उनके परिणामों पर आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जा सकती है।
उन्होंने एक सुरक्षित डिजिटल रिपॉजिटरी बनाने का भी सुझाव दिया, जिसमें हर फैसले से जुड़े नोडल प्वाइंट, समय-सीमा और उसके क्रियान्वयन की स्थिति का रिकॉर्ड रखा जा सके। इससे BRICS के फैसलों को लागू करने और उनकी प्रगति पर नजर रखने में निरंतरता बनाए रखने में मदद मिलेगी।