नेपाल में टनल रेस्क्यू चुनौतीपूर्ण, 4-5 फीट मलबे में फंसे मजदूर; भारत ने भेजी राहत की चौथी खेप

Nepal Tunnel Rescue: नेपाल में बाढ़ और भारी बारिश के बाद राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है। त्रिशूली हाइड्रोपावर की टनल में फंसे मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकालना रेस्क्यू टीम के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। टनल के अंदर करीब 4 से 5 फीट तक गीला मलबा जमा है और पानी की वजह से बचावकर्मियों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। इस बीच भारत ने नेपाल के लिए राहत सामग्री की चौथी खेप भेजी है।

रेस्क्यू टीम के एक सदस्य ने टनल के भीतर की स्थिति बताते हुए कहा कि मलबे और पानी के कारण अभियान बेहद चुनौतीपूर्ण है। इसके बावजूद मजदूरों को बाहर निकालने के लिए बचाव अभियान जारी है।

भारत ने भेजी 11 टन राहत सामग्री

नेपाल में आपदा प्रभावित लोगों की मदद के लिए भारत की ओर से शनिवार रात राहत सामग्री की चौथी खेप भेजी गई। विदेश मंत्री एस. जयशंकर के मुताबिक, भारतीय वायुसेना का सी-130 विमान 11 टन राहत सामग्री लेकर नेपाल पहुंचा। इसमें खोज और बचाव उपकरणों से लैस टनल तकनीकी टीम भी शामिल है। इस खेप में फोरेंसिक उपकरण और डीएनए विश्लेषण के विशेषज्ञों के अलावा कंबल, स्लीपिंग बैग, तिरपाल, प्लास्टिक शीट और स्वच्छता किट जैसी जरूरी सामग्री भेजी गई है।

टीम राहत-बचाव के साथ शवों की पहचान में भी नेपाल प्रशासन की मदद करेगी। इसके अलावा 230 फीट लंबे सिंगल-लेन मॉड्यूलर स्टील पुल के निर्माण के लिए जरूरी मशीनरी लेकर 16 ट्रक सड़क मार्ग से नेपाल पहुंच चुके हैं। इससे बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में संपर्क बहाल करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

अब तक 68.5 टन राहत सामग्री पहुंची

एस. जयशंकर ने कहा भारत अब तक 68.5 टन राहत सामग्री हवाई मार्ग से काठमांडू भेज चुका है। इसमें दवाइयां, पोर्टेबल जनरेटर, खाद्य पैकेट, पानी शुद्ध करने वाली गोलियां और तकनीकी उपकरण शामिल हैं। भारत ने कहा है कि नेपाल की जरूरत के मुताबिक आगे भी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

734 शव बरामद, सिर्फ 22 की पहचान

नेपाल में आई आपदा के बाद अब तक 734 शव बरामद किए जा चुके हैं, लेकिन इनमें केवल 22 की पहचान हो पाई है। बड़ी संख्या में शवों की पहचान नहीं होने से प्रशासन के सामने चुनौती बनी हुई है। अस्पतालों में जगह की कमी के कारण शवों को एयरटाइट बैग में रखकर जमीन के नीचे दफनाया जा रहा है। ऐसे में भारत से पहुंची फोरेंसिक और डीएनए विशेषज्ञों की टीम पहचान के काम में मदद कर सकती है।

बताया जा रहा है कि नेपाल में आई तबाही के पीछे ग्लेशियर टूटने की घटना भी प्रमुख वजह रही। चीन के शिजैंग स्वायत्त क्षेत्र के गिरोंग काउंटी में ग्लेशियर टूटने की घटना कैमरे में रिकॉर्ड हुई थी। इसके बाद नेपाल-चीन सीमा के गिरोंग पोर्ट पर भीषण मडस्लाइड की स्थिति बनी थी। फिलहाल त्रिशूली हाइड्रोपावर टनल में फंसे मजदूरों को निकालने के लिए अभियान जारी है।

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