नई दिल्ली/हैदराबाद: भारत ने आज निजी क्षेत्र की भागीदारी से अंतरिक्ष में एक नया इतिहास रचा। हैदराबाद स्थित स्काईरूट एयरोस्पेस का विक्रम-1 रॉकेट आज दोपहर लगभग 12:05 बजे श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के प्रथम लॉन्च पैड से सफलतापूर्वक लॉन्च हो गया। यह भारत का पहला निजी रूप से विकसित कक्षीय लॉन्च वाहन है, जिसने देश को अमेरिका और चीन के बाद निजी क्षेत्र से कक्षीय लॉन्च करने वाले तीसरे देश की सूची में शामिल कर दिया है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पहले ही इस मिशन को ऐतिहासिक बताया था। अपने आधिकारिक एक्स पोस्ट में उन्होंने लिखा था, “भारत की अंतरिक्ष यात्रा में एक ऐतिहासिक नया मोड़! यह चार चरणों वाला रॉकेट तेज और मांग पर आधारित लॉन्च सेवाएं प्रदान करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह हमारे युवाओं की प्रतिभा, दृढ़ता और उद्यमशीलता को दर्शाता है।” उन्होंने टीम को सफलता की शुभकामनाएं दीं और पूरे राष्ट्र से #IndiaWithVikram1 हैशटैग के साथ मिशन को समर्थन देने की अपील की थी।
मिशन ‘आगमन’
इसे मिशन आगमन के तहत विक्रम-1 (लगभग 24 मीटर लंबा) ने चरण अलगाव जैसे महत्वपूर्ण परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे किए। रॉकेट 350 किलोग्राम तक पेलोड ले जाने में सक्षम है। इस उड़ान में लैब-ग्रोन डायमंड से बना कमल, भारतीय वैज्ञानिकों की माइक्रो-मूर्तियाँ और अन्य प्रतीकात्मक पेलोड शामिल थे।
क्या है स्काई रूट
स्काईरूट एयरोस्पेस की स्थापना 2018 में पूर्व ISRO वैज्ञानिकों पवन कुमार चंदाना और नागा भारथ दाका ने की थी। कंपनी 2022 में विक्रम-S के साथ उप-कक्षीय उड़ान में सफल रही थी और हाल ही में भारत की पहली स्पेस टेक यूनिकॉर्न बन चुकी है। ISRO के सहयोग और केंद्र सरकार के स्पेस सेक्टर सुधारों ने इस उपलब्धि को संभव बनाया।
स्टार्टअप और रिसर्च को मिलेगा बढ़ावा
यह सफल लॉन्च भारत को वैश्विक स्पेस इकोनॉमी में मजबूत स्थिति दिलाएगा। अब छोटे उपग्रहों के लिए सस्ते, तेज और ऑन-डिमांड लॉन्च उपलब्ध होंगे, जो स्टार्टअप्स, रिसर्च और युवा उद्यमियों के सपनों को नई उड़ान देंगे। स्काईरूट के CEO पवन कुमार चंदाना ने इसे “टीम इंडिया की सामूहिक जीत” बताया। पूरी राष्ट्र इस उपलब्धि पर गर्व कर रहा है।