(नई दिल्ली): प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) द्वारा वर्ष 2026 को ‘परिवार वर्ष’ के रूप में घोषित करने की पहल की रविवार को सराहना की। अपने मासिक कार्यक्रम ‘मन की बात’ में उन्होंने इसकी तुलना भारत की पारंपरिक परिवार व्यवस्था से की।
सामुदायिक रसोई से बढ़ती पारिवारिक भावना
प्रधानमंत्री मोदी ने गुजरात के बेचराजी स्थित चंदनकी गांव की एक पहल का उदाहरण दिया, जहां सभी परिवारों के लिए सामुदायिक रसोई चलाई जाती है। पीएम मोदी ने कहा, “यहां के लोग, विशेषकर बुजुर्ग, अपने घरों में खाना नहीं बनाते क्योंकि गांव में एक शानदार सामुदायिक रसोई है। यह पहल लोगों को आपस में जोड़ती है और पारिवारिक भावना को बढ़ावा देती है।”
प्रधानमंत्री ने बताया कि कुछ ही दिन पहले उनके भाई और यूएई के राष्ट्रपति महामहिम शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान भारत आए थे। अल नाहयान ने उन्हें सूचित किया कि यूएई साल 2026 को ‘परिवार वर्ष’ के रूप में मना रहा है। मोदी ने इसे “बहुत ही सराहनीय पहल” बताते हुए कहा कि इसका उद्देश्य वहां के लोगों के बीच सौहार्द और सामुदायिक भावना को मजबूत करना है।
भारत की पारंपरिक परिवार व्यवस्था
पीएम मोदी ने कहा कि भारत में परिवार व्यवस्था और सामुदायिक जीवन की परंपरा सदियों पुरानी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस तरह की पहल न केवल परिवारों को जोड़ती है बल्कि समाज में सहयोग और मेल-जोल की भावना को भी बढ़ावा देती है। प्रधानमंत्री ने इस मौके पर लोगों से भी आग्रह किया कि वे पारिवारिक मूल्यों और सामुदायिक भावना को सशक्त बनाने के लिए अपने स्तर पर पहल करें।