Veer Bal Diwas on PM Modi: (नई दिल्ली): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीर बाल दिवस के अवसर पर कहा कि दसवें सिख गुरु, श्री गुरु गोबिंद सिंह के पुत्र साहिबजादों का बलिदान भारत के अदम्य साहस, शौर्य और वीरता का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि बाबा जोरावर सिंह और बाबा फतेह सिंह ने बेहद कम उम्र में मुगल शासन की क्रूरता का सामना किया और धर्म तथा देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया।
प्रधानमंत्री ने कहा, “साहिबजादों ने उम्र की सीमाओं को पार कर मुगल शासन के खिलाफ खड़े होकर मजहबी कट्टरता और आतंक के सामने चट्टान की तरह मजबूती दिखाई। उनके साहस और बलिदान ने हर भारतीय को शक्ति और प्रेरणा दी है।” मोदी ने यह भी कहा कि माता गुजरी जी और श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के आदर्श आज भी युवाओं को नैतिक और वीरता की प्रेरणा प्रदान करते हैं।
वीर बाल दिवस का महत्व और उद्देश्य
प्रधानमंत्री ने याद दिलाया कि 9 जनवरी 2022 को घोषणा की गई थी कि 26 दिसंबर को साहिबजादों की शहादत की याद में ‘वीर बाल दिवस’ मनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि देशभर में आयोजित कार्यक्रमों का उद्देश्य नागरिकों और बच्चों को साहिबजादों के अदम्य साहस, त्याग और बलिदान से रूबरू कराना है। मोदी ने जोर दिया कि वीर बाल दिवस केवल स्मृति का दिन नहीं बल्कि साहस और नैतिक शक्ति के आदर्शों को समर्पित दिन है।
गुलामी की मानसिकता से मुक्ति का संकल्प
पीएम मोदी ने कहा कि देश ने अब गुलामी की मानसिकता से मुक्त होने का संकल्प लिया है और अब भारतीय नायकों और नायिकाओं की वीरता को हाशिये पर नहीं रखा जाएगा। उन्होंने बताया कि औपनिवेशिक मानसिकता के बीज 1835 में ब्रिटिश राजनेता मैकाले ने बोए थे, और देश को अब इसे पूरी तरह मिटाना है। मोदी ने कहा कि 2035 तक ‘मैकाले की साजिश’ के 200 वर्ष पूरे होंगे और भारत पूरी तरह गुलामी की मानसिकता से मुक्त हो जाएगा।
जेनरेशन Z और अल्फा के प्रति भरोसा
प्रधानमंत्री ने ‘जेनरेशन जेड’ (1997-2012) और ‘जेनरेशन अल्फा’ (2010-2025) की प्रशंसा करते हुए कहा कि ये पीढ़ियां देश को विकसित भारत के लक्ष्य तक ले जाएंगी। उन्होंने कहा, “मैं जेन Z और जेन अल्फा की क्षमता और आत्मविश्वास देखता हूँ, और मुझे आप पर पूरा भरोसा है।” उन्होंने बच्चों की उपलब्धियों का भी जिक्र किया और बताया कि इस वर्ष देशभर से 20 बच्चों को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार (PMRBP) से सम्मानित किया गया।
भाषाई विविधता और लोकतंत्र में योगदान
पीएम मोदी ने हाल ही में संसद में हुए शीतकालीन सत्र का उदाहरण दिया, जिसमें सांसदों ने लगभग 160 भाषण विभिन्न भारतीय भाषाओं में दिए। इसमें लगभग 50 भाषण तमिल में, 40 से अधिक मराठी में और लगभग 25 बांग्ला में प्रस्तुत किए गए। उन्होंने इसे देश की भाषाई विविधता और लोकतांत्रिक शक्ति का प्रतीक बताया।
साहिबजादों की गाथा और देश के लिए संदेश
प्रधानमंत्री ने कहा कि साहिबजादों का बलिदान केवल शक्ति और वीरता का उदाहरण नहीं, बल्कि सत्य और असत्य, धर्म और कट्टरता के बीच संघर्ष का प्रतीक है। उन्होंने देशवासियों से अपील की कि साहिबजादों की गाथा हर नागरिक की जुबान पर होनी चाहिए और उनकी वीरता को आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाना हर भारतीय की जिम्मेदारी है।
पीएम मोदी ने कहा, “जिस राष्ट्र के पास ऐसा गौरवशाली अतीत है, जिसकी युवा पीढ़ी को ऐसी प्रेरणा मिली है, वह राष्ट्र क्या कुछ नहीं कर सकता। वीर साहिबजादों ने यह दिखाया कि साहस, त्याग और धर्मनिष्ठा किसी उम्र या शक्ति से नहीं मापी जाती।”