Mann Ki Baat: (नई दिल्ली): प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में नागरिकों से आग्रह किया कि वे राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे होने का उत्सव मनाएं और इसके मूल्यों को आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाएं।
‘वंदे मातरम भारत की आत्मा का प्रतीक
पीएम मोदी ने कहा कि बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित और रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा 1896 में पहली बार गाए गए इस गीत ने भारत की आत्मा को स्वर दिया है। उन्होंने कहा, “‘वंदे मातरम’ भारत की जीवंतता और भव्य स्वरूप का प्रतीक है। यह गीत हर भारतीय के मन में देशभक्ति का संचार करता है। प्रधानमंत्री ने बताया कि इस ऐतिहासिक अवसर को मनाने के लिए देशभर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि लोग इस गीत के संदेश को नई पीढ़ी तक पहुँचा सकें।
देशभर की प्रेरणादायक पहलें
अपने लगभग 30 मिनट के संबोधन में प्रधानमंत्री ने देश के अलग-अलग हिस्सों से आई अनूठी पहलों की सराहना की।
उन्होंने गुजरात में मैंग्रोव लगाने की पहल, छत्तीसगढ़ के ‘गार्बेज कैफे’ और बेंगलुरु में झीलों के पुनर्जीवन के प्रयासों का उल्लेख किया। पीएम मोदी ने कहा कि ये उदाहरण दिखाते हैं कि आम नागरिक कैसे अपनी पहल से समाज में सकारात्मक बदलाव ला रहे हैं।
अर्धसैनिक बलों में भारतीय नस्ल के श्वानों की भूमिका
प्रधानमंत्री ने बीएसएफ और सीआरपीएफ द्वारा भारतीय नस्ल के श्वानों को अपनी इकाइयों में शामिल करने की सराहना की।
उन्होंने कहा कि इन श्वानों ने साहस और निष्ठा के कई उदाहरण पेश किए हैं। पीएम मोदी ने बताया कि पिछले वर्ष छत्तीसगढ़ के माओवादी क्षेत्र में गश्त के दौरान एक देशी श्वान ने 8 किलोग्राम विस्फोटक का पता लगाया था, जिससे बड़ी दुर्घटना टल गई। उन्होंने कहा कि अब रामपुर हाउंड, मुधोल हाउंड, मोंगरेल्स, कोम्बाई और पांडिकोना जैसी भारतीय नस्लों को श्वान दस्तों में शामिल किया गया है। इनमें से कई श्वान 31 अक्टूबर को सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती पर गुजरात के एकता नगर में होने वाली परेड में भाग लेंगे।
ओडिशा की कॉफी और महिलाओं का सशक्तिकरण
प्रधानमंत्री ने ओडिशा के कोरापुट जिले में कॉफी की खेती के माध्यम से हो रहे बदलावों की सराहना की। उन्होंने कहा, “कोरापुट के कई लोग जुनून के साथ कॉफी की खेती कर रहे हैं। इस प्रयास ने स्थानीय महिलाओं के जीवन में सुखद परिवर्तन लाया है। पीएम मोदी ने कहा कि भारत की कॉफी दुनिया भर में लोकप्रिय हो रही है चाहे कर्नाटक के चिकमंगलुरु, कुर्ग और हासन हों, तमिलनाडु के पुलनी, शेवरॉय, नीलगिरि और अन्नामलाई के क्षेत्र हों या केरल के वायनाड और त्रावणकोर भारत की कॉफी की विविधता देखते ही बनती है।”
संस्कृत को सोशल मीडिया से मिली नई ऊर्जा
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में संस्कृत भाषा की बढ़ती लोकप्रियता पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स ने संस्कृत को नई “प्राणवायु” दी है। कई युवा अब रील्स और वीडियो के माध्यम से संस्कृत सीखने और सिखाने में जुटे हैं। पीएम मोदी ने विशेष रूप से युवा कंटेंट क्रिएटर और क्रिकेटर यश सालुंड्के का उल्लेख किया, जो संस्कृत में बात करते हुए क्रिकेट खेलते हैं। उन्होंने कहा कि यश की रीलें लोगों के बीच संस्कृत के प्रति नई रुचि और उत्साह जगा रही हैं।