भुज (गुजरात): विजयादशमी के शुभ अवसर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुजरात के भुज मिलिट्री स्टेशन का दौरा किया और भारतीय सेना के जवानों के साथ शस्त्र पूजा की। इस पारंपरिक कार्यक्रम के माध्यम से उन्होंने देश की सैन्य शक्ति, सांस्कृतिक मूल्यों और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को रेखांकित किया।
शस्त्र और शास्त्र का संतुलन ज़रूरी
रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि भारत की परंपरा में शास्त्र (ज्ञान) और शस्त्र (शक्ति) दोनों का समान महत्व है। उन्होंने कहा हमारे देवी-देवताओं की मूर्तियों में एक हाथ में शास्त्र होता है और दूसरे में शस्त्र, क्योंकि वे हमें यह संदेश देते हैं कि ज्ञान की रक्षा शक्ति से ही की जा सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल शस्त्र होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि शस्त्र के प्रयोग के लिए नैतिक मार्गदर्शन और मनोबल भी जरूरी है। इसी संतुलन ने भारत को एक जीवंत और अजेय सभ्यता बनाया है।
भारत है अब शस्त्र निर्माता और निर्यातक
राजनाथ सिंह ने गर्व के साथ कहा कि आज भारत आत्मनिर्भरता की दिशा में तेज़ी से बढ़ रहा है। अब भारत केवल शस्त्रों का उपभोक्ता नहीं है, बल्कि निर्माता और निर्यातक भी बन रहा है। उन्होंने कहा शस्त्रों की पूजा सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि यह आत्मबल, आत्मनिर्भरता और राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति हमारी प्रतिबद्धता का प्रतीक है।”
भारत की सैन्य शक्ति का प्रदर्शन
रक्षा मंत्री ने हाल ही में संपन्न ऑपरेशन सिंदूर का ज़िक्र करते हुए कहा कि यह अभियान भारत की सैन्य दक्षता और सामरिक संयम का उदाहरण था। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान ने लेह से लेकर सर क्रीक तक भारत की रक्षा प्रणाली को भेदने की कोशिश की, लेकिन भारतीय सेनाओं ने न सिर्फ उसका जवाब दिया बल्कि पाकिस्तानी एयर डिफेंस सिस्टम को एक्सपोज़ कर दिया। उन्होंने कहा भारत की सेनाएं जब चाहें, जहां चाहें और जैसे चाहें, दुश्मन को जवाब देने में सक्षम हैं। मगर हमने अपनी शक्ति का उपयोग केवल आतंकवाद के खिलाफ किया। हम युद्ध नहीं चाहते, लेकिन अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए कोई भी कदम उठाने को तैयार हैं।
रक्षा मंत्री ने पाकिस्तान को साफ शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सर क्रीक क्षेत्र में कोई दुस्साहस किया गया, तो इतिहास और भूगोल दोनों बदल दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि भारत ने इस विवाद का शांतिपूर्ण समाधान निकालने के कई प्रयास किए हैं, लेकिन पाकिस्तान की नीयत में खोट है।
सैनिकों के मनोबल की सराहना
राजनाथ सिंह ने कहा कि किसी भी सैन्य शक्ति की असली ताकत सिर्फ हथियारों में नहीं, बल्कि जवानों के मनोबल, एकता और साहस में होती है। उन्होंने महात्मा गांधी का उदाहरण देते हुए कहा गांधी जी के पास कोई हथियार नहीं था फिर भी उन्होंने दुनिया की सबसे बड़ी साम्राज्यवादी शक्ति को झुका दिया। आज हमारे सैनिकों के पास शस्त्र भी हैं और मनोबल भी, इसलिए कोई चुनौती टिक नहीं सकती।
शस्त्रों का प्रयोग धर्म की स्थापना के लिए
रक्षा मंत्री ने अपने भाषण को धार्मिक और सांस्कृतिक संदर्भों से जोड़ते हुए कहा कि भारत में शस्त्र कभी आक्रामकता के प्रतीक नहीं रहे, बल्कि धर्म, न्याय और सुरक्षा के साधन रहे हैं। उन्होंने भगवान राम, माता दुर्गा और श्रीकृष्ण के उदाहरण देते हुए कहा कि शस्त्रों का प्रयोग हमेशा अधर्म के विनाश और धर्म की स्थापना के लिए किया गया है।