अमेरिका से टैरिफ वार छिड़ने के बीच भारत-चीन रिश्तों में नई हलचल, क्या बदल रहा है एशिया का समीकरण?

S Jaishankar And China FM Wang Yi

India-China new relations: अमेरिका से छिड़े टैरिफ वार के बीच भारत-चीन में रिश्तों के नए अंकुर फूटने लगे हैं। वक़्त की चाल ने ऐसे मोड़ दिए कि दुश्मन भी अब दोस्त जैसे लगने लगे… ये शायरी भारत चीन की बढ़ती दोस्ती पर बखूबी बैठती है.. और इसी के साथ एक कहावत जो प्राचीन काल से चली आ रही है…और इसे अक्सर राजनीति, कूटनीति और व्यक्तिगत रिश्तों में इस्तेमाल किया जाता है… जिसका सीधा सा मतलब होता है..जब दो देश जो पहले एक-दूसरे के दुश्मन हुआ करते थे.. वो एक तीसरे देश के खिलाफ एकजुट हो सकते हैं… तो कहा जाता है कि ‘मेरे दुश्मन का दुश्मन मेरा दोस्त होता है’… ऐसा हम क्यों कह रहे है… ये जानने के लिए आप इस पूरी रिपोर्ट को पढ़कर समझ जाएंगे।

भारत-अमेरिका के रिश्तों में तनाव के बीच चीन से नजदीकी

दरअसल हाल ही में अमेरिका के टैरिफ वार के बाद भारत और अमेरिका के रिश्तों में खटास आ गई है…ट्रंप प्रशासन ने भारत द्वारा रूसी तेल खरीदने पर नाराज़गी जताते हुए भारतीय आयात पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया… इससे दोनों देशों के बीच सालों से चल रहे रक्षा और तकनीकी सहयोग पर असर पड़ने लगा है… इसी पृष्ठभूमि में चीन के लिए ये एक रणनीतिक अवसर बन गया है… चीन और भारत के बीच जो तनाव कुछ साल में खासकर गलवान घाटी की हिंसा के बाद बढ़ गया था… लेकिन अब उसमें नरमी देखने को मिल रही है…

भारत दौरे पर चीन के विदेश मंत्री वांग यी

पिछले साल अक्टूबर में कजान में हुए ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात हुई थी… जिसके बाद से दोनों देशों के बीच संवाद बढ़ा है… अब चीन के विदेश मंत्री वांग यी दो दिवसीय भारत यात्रा पर आए हैं… उन्होंने भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर से मुलाकात की… सीमा विवाद, आतंकवाद और वैश्विक व्यवस्था जैसे मुद्दों पर चर्चा की… विदेश मंत्री जयशंकर ने साफ कहा कि भारत और चीन ने एक कठिन दौर देखा है… लेकिन अब आगे बढ़ने के लिए तीन बातें जरूरी हैं… आपसी सम्मान, आपसी संवेदनशीलता और साझे हित।

मतभेद को टकराव में नहीं बदलने पर सहमति

जयशंकर और चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने ये भी माना कि मतभेद हो सकते हैं… लेकिन उन्हें टकराव में नहीं बदलना चाहिए। इस यात्रा के दौरान वांग यी की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से मुलाकात भी तय है। जो इन रिश्तों की दिशा तय कर सकती है। चीन की ओर से कहा गया है कि वो आपसी विश्वास और सहयोग बढ़ाना चाहता है। जबकि भारत को उम्मीद है कि बातचीत से रिश्तों में सुधार का रास्ता खुलेगा। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ये मुलाकात दोनों देशों के रिश्तों में नई शुरुआत करेगी?… या फिर ये सिर्फ वैश्विक समीकरणों के चलते उठाया गया एक रणनीतिक कदम ही बनकर रह जाएगा। हालांकि अब समय इसका जवाब देगा। मगर फिलहाल भारत और चीन के बीच रिश्तों में सुधार दोनों ही देशों के लिए बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच बेहद फायदेमंद है।

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