किसानों के हित से कोई समझौता नहीं, व्यक्तिगत कीमत चुकाने को भी तैयार: प्रधानमंत्री मोदी

Narendra Modi, Prime Minister

PM Modi on World Agriculture Summit: (नई दिल्ली): प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बृहस्पतिवार को कहा कि भारत अपने किसानों, मछुआरों और डेयरी क्षेत्र से जुड़े लोगों के हितों से कभी समझौता नहीं करेगा और अगर जरूरत पड़ी, तो वह इसके लिए व्यक्तिगत रूप से भी कीमत चुकाने को तैयार हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार के लिए किसानों का हित सर्वोपरि है और इसे किसी भी अंतरराष्ट्रीय दबाव के आगे झुकने नहीं दिया जाएगा।

प्रधानमंत्री मोदी यह बात प्रख्यात कृषि वैज्ञानिक एम.एस. स्वामीनाथन की जन्मशती के अवसर पर आयोजित तीन दिवसीय वैश्विक कृषि सम्मेलन को संबोधित करते हुए कही। यह आयोजन भारत की कृषि प्रगति, किसानों की भूमिका और भविष्य की दिशा पर केंद्रित था।

अमेरिकी टैरिफ पर दिया ये बयान

प्रधानमंत्री का यह बयान उस समय आया है जब अमेरिका ने हाल ही में भारत से आयातित कृषि और अन्य वस्तुओं पर शुल्क 50 प्रतिशत तक बढ़ाने की घोषणा की है। अमेरिका ने यह कदम भारत द्वारा रूस से तेल आयात जारी रखने के चलते उठाया है। हालांकि इस आर्थिक दबाव के बीच प्रधानमंत्री मोदी ने साफ किया कि भारत अपने किसानों के स्वाभिमान और हितों से कोई समझौता नहीं करेगा, भले ही इसके लिए व्यक्तिगत स्तर पर भी उन्हें कुछ कीमत चुकानी पड़े। उन्होंने कहा “हमारे लिए किसानों का हित सर्वोपरि है। भारत कभी किसानों, मछुआरों और डेयरी क्षेत्र से जुड़े लोगों के हितों से समझौता नहीं करेगा। मुझे लगता है कि मुझे व्यक्तिगत रूप से इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी और मैं इसके लिए तैयार हूं।”

स्वामीनाथन को दी श्रद्धांजलि

इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने एम.एस. स्वामीनाथन के सम्मान में एक स्मारक सिक्का और डाक टिकट भी जारी किया। उन्होंने स्वामीनाथन के योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने भारत में हरित क्रांति के माध्यम से कृषि और किसानों की दशा-दिशा बदल दी। मोदी ने उन्हें “भारत का सच्चा सपूत” बताते हुए कहा कि उनका जीवन देश के किसानों को सशक्त करने के लिए समर्पित रहा।

स्वामीनाथन के योगदान को किया याद

एम.एस. स्वामीनाथन एक प्रख्यात भारतीय आनुवंशिकीविद् और कृषि वैज्ञानिक थे। उन्होंने 1960 के दशक में भारत में उच्च उपज वाली गेहूं और चावल की किस्मों को विकसित कर आधुनिक कृषि तकनीकों को बढ़ावा दिया। उनके प्रयासों ने देश को खाद्यान्न संकट से उबारा और भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्हें “भारत में हरित क्रांति का जनक” कहा जाता है। उनके योगदान के चलते भारत में खाद्य उत्पादन में आश्चर्यजनक वृद्धि हुई और ग्रामीण गरीबी में कमी आई। उनका जन्म 7 अगस्त 1925 को कुंभकोणम, तमिलनाडु में हुआ था। उन्होंने 28 सितंबर 2023 को 98 वर्ष की आयु में चेन्नई में अंतिम सांस ली।

कृषि के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता

प्रधानमंत्री मोदी ने सम्मेलन के माध्यम से देश और दुनिया को यह संदेश दिया कि भारत की कृषि नीतियां केवल आर्थिक लाभ के आधार पर नहीं, बल्कि किसानों की स्थायी भलाई और समृद्धि को ध्यान में रखकर बनाई जाती हैं। उन्होंने कहा कि भारत का किसान सिर्फ एक उत्पादक नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माता है।

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