यूपी सरकार की नई पहल, दिव्यांग और सामान्य बच्चों के लिए खुलेगा समेकित विशेष विद्यालय

सीएम योगी

CM Yogi Adityanath: (लखनऊ): उत्तर प्रदेश सरकार की दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग ने दिव्यांग और सामान्य दोनों प्रकार के विद्यार्थियों को एक ही छत के नीचे समान, गुणवत्तापूर्ण और संवेदनशील शिक्षा देने के लिए ‘समेकित विशेष माध्यमिक विद्यालयों’ की स्थापना शुरू की है। यह पहल दिव्यांग बच्चों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने और उनकी शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से की जा रही है।

वर्तमान स्थिति और विद्यालयों का विस्तार

सरकार की ओर से जारी आधिकारिक बयान के मुताबिक, अभी तक प्रयागराज, कन्नौज, औरैया, आजमगढ़, बलिया, महराजगंज और लखनऊ में सात समेकित विशेष माध्यमिक विद्यालय संचालित हो रहे हैं। इन विद्यालयों में कक्षा छठी से बारहवीं तक के छात्र पढ़ते हैं। हर स्कूल की स्वीकृत क्षमता लगभग 560 विद्यार्थियों की है, जिसमें 50% सीटें दिव्यांग बच्चों के लिए आरक्षित हैं, जबकि बाकी 50% सामान्य विद्यार्थियों के लिए। इस मॉडल के तहत अब तक लगभग 400 विद्यार्थियों का पंजीकरण हो चुका है।

बयान में बताया गया कि सरकार ने योजना बनाई है कि आगामी शैक्षणिक सत्र 2025-26 से गाजियाबाद और प्रतापगढ़ में भी ऐसे दो नए समेकित विद्यालय खोले जाएं। इससे प्रदेश के पश्चिमी और पूर्वांचल क्षेत्रों के दिव्यांग बच्चों को भी इस अनूठी शैक्षणिक व्यवस्था का लाभ मिलेगा। यह स्कूल न केवल शिक्षा प्रदान करेंगे बल्कि बच्चों के सर्वांगीण विकास में भी मददगार साबित होंगे।

विजन समानता सम्मान और अवसर

पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं दिव्यांगजन सशक्तीकरण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नरेंद्र कश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हमेशा दिव्यांगों को मुख्यधारा से जोड़ने और उन्हें समान अवसर देने पर जोर दिया है। उन्होंने कहा, “यह समेकित विशेष माध्यमिक विद्यालय केवल एक शैक्षिक पहल नहीं है, बल्कि यह नए भारत के नए उत्तर प्रदेश की उस सोच को दर्शाती है जिसमें समानता, सम्मान और अवसर हर नागरिक का मूल अधिकार है।”

शिक्षा का नया अध्याय

सीएम योगी की यह पहल न केवल दिव्यांग बच्चों के लिए शिक्षा की पहुंच बढ़ाएगी, बल्कि सामान्य बच्चों को भी संवेदनशीलता और समावेशिता का संदेश देगी। इससे समाज में समरसता और भाईचारे को बल मिलेगा। इस योजना के तहत शिक्षा की गुणवत्ता को बनाए रखने के लिए विशेष शिक्षकों की नियुक्ति और समर्पित संसाधनों का प्रावधान भी किया गया है, ताकि दिव्यांग और सामान्य बच्चों को एक ही मंच पर समान अवसर मिल सकें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *