Power minister meeting:(चंडीगढ़): भारत को वर्ष 2047 तक “विकसित राष्ट्र” बनाने के उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए आज केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय की एक महत्वपूर्ण क्षेत्रीय बैठक चंडीगढ़ में आयोजित की गई। इस बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने की। बैठक में उत्तर भारत के 11 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और चंडीगढ़ के बिजली मंत्रियों और अधिकारियों ने भाग लिया।
बैठक में ऊर्जा क्षेत्र में सुधार, ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने, तकनीकी दक्षता में सुधार, और आने वाले वर्षों की बिजली जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विस्तृत चर्चा हुई। छह घंटे तक चली इस बैठक में ऊर्जा वितरण में हो रहे नुकसान (लाइन लॉस), सरकारी कार्यालयों में प्रीपेड मीटर लगाने, और उपभोक्ताओं को अधिक पारदर्शी एवं सुविधाजनक सेवा देने जैसे मुद्दों पर भी मंथन हुआ।
बिजली में आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़े कदम
केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने कहा हमारी सरकार का लक्ष्य है कि पावर सेक्टर में कोई कमी न आने दी जाए। आने वाले समय में भारत ग्रीन एनर्जी के माध्यम से आत्मनिर्भर ही नहीं, बल्कि ऊर्जा निर्यातक भी बन सकेगा। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि ऊर्जा क्षेत्र में लगभग ₹45 लाख करोड़ का निवेश आने वाले समय में संभावित है, जो ग्रीन एनर्जी के उत्पाद, वितरण और तकनीकी सुधार पर केंद्रित होगा।
किसानों और आम जनता को राहत
बैठक में मंत्री ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार किसानों को लगभग मुफ्त बिजली देने की नीति पर कार्य कर रही है और इसे और सशक्त किया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि देश में ऊर्जा आपूर्ति को मजबूत करने के लिए बिजली के स्मार्ट वितरण तंत्र की योजना बनाई जा रही है।
2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य
मनोरहर लाल ने कहा कि वर्ष 2024 में भारत की पीक पावर डिमांड 250 मेगावाट तक पहुंची थी। आने वाले वर्षों में यह और बढ़ेगी, जिसे ध्यान में रखते हुए ऊर्जा उत्पादन और वितरण की क्षमता को बढ़ाने पर बल दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि सरकारी कार्यालयों में प्रीपेड मीटर लगाए जाएंगे ताकि उपभोग पारदर्शी हो और बिजली की बर्बादी रोकी जा सके। साथ ही, लाइन लॉस कम करने के लिए राज्यों को विशेष तकनीकी सहायता और नीतिगत मार्गदर्शन प्रदान किया जाएगा।
ग्रीन एनर्जी भारत की नई पहचान
बैठक में यह भी चर्चा हुई कि भारत आने वाले वर्षों में सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और हाइड्रो पावर पर विशेष बल देगा। इससे न केवल पर्यावरण संरक्षण को बल मिलेगा, बल्कि ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में भी भारत बड़ी छलांग लगाएगा। चंडीगढ़ में संपन्न यह बैठक ऊर्जा क्षेत्र में सुधार, राज्यों के समन्वय, और भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में वैश्विक शक्ति बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम रही। सभी राज्यों ने अपनी समस्याएं और समाधान साझा किए, और केंद्र सरकार ने हरसंभव सहयोग का भरोसा दिया।