Parliament Winter Session Rajyasabha Constitution Debate: संसद के शीतकालीन सत्र के 16वें दिन लोकसभा के बाद राज्यसभा में दो दिवसीय संविधान पर चर्चा की शुरुआत हुई। सरकार की ओर से वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने चर्चा की शुरुआत की। विपक्ष की ओर से नेता सदन मल्लिकार्जुन खरगे चर्चा की शुरुआत कर सकते हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी मंगलवार को विपक्ष के सवालों को जवाब दे सकते हैं।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने संसद के दोनों सदनों के पीठासीन अधिकारियों को चिट्ठी लिखकर संविधान पर चर्चा कराने की मांग की थी। लोकसभा में 13 और 14 दिसंबर को संविधान पर विशेष चर्चा हो चुकी है। पीएम मोदी ने शनिवार को चर्चा के दौरान लोकसभा में संविधान पर विशेष चर्चा में भाग लिया था। इस दौरान उन्होंने सदन में 11 संकल्प रखे थे। एक घंटा 49 मिनट तक संविधान चर्चा पर स्पीच दी थी।
राज्यसभा में सरकार की ओर से चर्चा करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बैंकों के राष्ट्रीयकरण के समय इंदिरा गांधी के बयान का जिक्र करते हुए कहा कि वह जो भी बातें बोली थीं, उनमें से एक भी लक्ष्य अचीव नहीं किया जा सका था। जनधन खाते, पीएम मुद्रा ये सब मोदी सरकार में संभव हो सके और एक पूर्व प्रधानमंत्री ने यह भी कहा था कि हम यहां से एक रुपया भेजते हैं और 15 पैसे पहुंच पाते हैं। तकनीकी का उपयोग कर डीबीटी के जरिए हम एक रुपये भेजते हैं और एक रुपए आम आदमी तक पहुंचता हैं।
आगे वित्त मंत्री ने कहा कि कांग्रेस आज संविधान-संविधान चिल्ला रही है, देश में सबसे ज्यादा अगर किसी पार्टी ने संविधान के साथ खिलवाड़ किया है तो वह कांग्रेस पार्टी है। एक परिवार को बचाने के लिए लगातार संविधान को तार-तार किया गया। आपातकाल के कालखंड से लेकर अब तक कई बार संविधान में संशोधन करके भारतीय लोकतंत्र और न्यायिक प्रणाली को कमजोर किया गया।
जयराम रमेश से भिड़ गई वित्त मंत्री
इस दौरान वह जीएसटी को लेकर कांग्रेस सांसद जयराम रमेश के साथ भिड़ गई। उन्होंने कांग्रेस सांसद से लिखित माफी मांगने को कहा है, क्योंकि उन्होंने उन पर झूठ बोलने का आरोप लगाया था। वित्त मंत्री ने कहा- मैं कभी झूठ नहीं बोलती। दूसरों पर झूठ बोलने का आरोप लगाना कांग्रेस के डीएनए में है।
कांग्रेस शासन के तहत महाराष्ट्र ने जीएसटी के कुछ प्रावधानों का विरोध किया था। उन्होंने कहा, वे खुद जीएसटी संशोधन पेश करने में विफल रहे और अब, जब हम इसे लागू करते हैं, तो वे चिल्लाते हैं। इनके एक नेता ने इसे गब्बर सिंह टैक्स करार दिया था। कांग्रेस लगातार हर विधेयक पर बरगलाने का काम कर रही है और वह अपना स्पष्ट मत नहीं रख रही हैं।