Delhi: उपराष्ट्रपति धनखड़ के खिलाफ खरगे ने खोला मोर्चा, ‘विपक्षी दलों को विरोधी और खुद को RSS का एकलव्य बताते हैं’

Indi Alliance PC Mallikarjun Kharge: राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ के खिलाफ विपक्ष ने मोर्चा खोल दिया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा, उपराष्ट्रपति दूसरा सबसे बड़ा संवैधानिक पद है। साल 1952 से अब तक किसी भी उपराष्ट्रपति के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाया गया क्योंकि सभी निष्पक्ष रहें और नियमानुसार सदन को चलाया। भारत के इतिहास में पहली बार सभापति के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया है। सदन में नियमों को ताक पर रखकर राजनीति हो रही है।

खरगे ने कहा कि, बीते तीन सालों में उनका आचरण संविधान के विपरीत रहा है, उनका ध्यान मुद्दों पर बात करना कम सरकार की तारीफ करना ज्यादा है। सदन में वह खुद को कभी आरएसएस का एकलव्य बताते हैं तो कभी विपक्षी दलों को विरोधियों की तरह देखते हैं। उन्होंने कहा कि, वह संसद में विपक्षी पार्टियों की आवाज योजनाबद्ध तरीके से रोकते हैं। विपक्ष की आवाज को दबाने का काम राज्यसभा के सभापति करते हैं। सदन अगर नहीं चलता है तो उसका कारण हमारे सभापति हैं।

सभापति की तरफ से किए जा रहे भेदभाव के कारण हमने उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया है। बीते तीन सालों में उनका आचरण उनकी पद की गरिमा के विपरीत रहा है, वो ख़ुद को आरएसएस का एकलव्य बताते हैं, विपक्ष को विरोधी मानते हैं। अपमानजनक टिप्पणियां करते हैं। सदन में काफी अनुभवी सदस्य हैं, लेकिन सभापति उन्हें हेडमास्टर की तरह प्रवचन देते हैं। सभापति योजनाबद्ध तरीके से चर्चा नहीं होने देते और विपक्षी दल के सदस्यों को बोलने नहीं देते। उनकी निष्ठा संविधान की बजाय सत्ताधारी दल के लिए है।

देश की गरिमा को ठेस पहुंचाई गई- खरगे

इस समय सभापति प्रमोशन के लिए सरकार के प्रवक्ता की तरह काम कर रहे हैं। सदन में गतिरोध का सबसे बड़ा कारण सभापति खुद हैं। खरगे ने कहा कि धनखड़ के आचरण ने देश की गरिमा को ठेस पहुंचाई है और उन्होंने ऐसी स्थिति बना दी है कि हमें अविश्वास प्रस्ताव लेकर आना पड़ा। हमारा उनसे कोई निजी बैर नहीं है।

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बता दें कि, इस दौरान विपक्षी गठबंधन के सभी सहयोगी दलों के नेता मौजूद रहे। कांग्रेस से मल्लिकार्जुन खरगे और जयराम रमेश रहे। शरद पवार की एनसीपी से फौजिया खान, आरजेडी से मनोज झा, डीएमके से तिरुचि शिवा, समाजवादी पार्टी से जावेद अली खान, टीएमसी से नदीमुल हक और सागरिका घोष, शिवसेना यूबीटी से संजय राउत, सीपीएम से जॉन ब्रिटास, सीपीआई से संदोष कुमार और केसीएम से जोस के. मणि मौजूद रहे।

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