Lal Krishna Advani Bharat Ratna: बीजेपी के सीनियर नेता और देश के पूर्व डिप्टी पीएम लालकृष्ण आडवाणी को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया जाएगा। इसकी जानकारी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोशल मीडिया (एक्स) पर दी है। PM Modi ने लिखा, कि मुझे यह बताते हुए बहुत खुशी हो रही है कि लालकृष्ण आडवाणी जी को भारत रत्न से सम्मानित किया जाएगा।
मैंने भी उनसे बात की और इस सम्मान से सम्मानित होने पर उन्हें बधाई दी। हमारे समय के सबसे सम्मानित राजनेताओं में से एक, आडवाणी जी का भारत के विकास में अविस्मरणीय योगदान है। उनका जीवन जमीनी स्तर पर काम करने से शुरू होकर हमारे उपप्रधानमंत्री के रूप में देश की सेवा करने तक का है।
उन्होंने हमारे गृह मंत्री और सूचना एवं प्रसारण मंत्री के रूप में भी अपनी पहचान बनाई और उनके संसदीय कार्य हमेशा अनुकरणीय और समृद्ध अंतर्दृष्टि से भरे रहे हैं। बीजेपी को एक मजबूत पार्टी बनाने में उन्होंने अहम भूमिका निभाई है। मेरे लिए यह बहुत भावुक क्षण है।
पीएम मोदी ने आगे लिखा, सार्वजनिक जीवन में आडवाणी जी की दशकों लंबी सेवा को पारदर्शिता और अखंडता के प्रति अटूट प्रतिबद्धता के रूप में जाना जाता है जिसने राजनीतिक नैतिकता में एक अनुकरणीय मानक स्थापित किए। उन्होंने राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक पुनरुत्थान को आगे बढ़ाने की दिशा में शानदार प्रयास किए हैं।
कहां हुआ एलके आडवाणी का जन्म ?
बता दें कि, बीजेपी के दिग्गज नेता का जन्म 8 नवंबर, 1927 को वर्तमान पाकिस्तान के कराची में हुआ था। उनके पिता का नाम केडी आडवाणी और मां का नाम ज्ञानी आडवाणी था। भारत और पाकिस्तान के विभाजन के बाद वह भारत आ गए। आडवाणी ने 25 फ़रवरी 1965 को ‘कमला आडवाणी’ को अपनी अर्धांगिनी बनाया और दोनों के दो बच्चे हैं।
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लालकृष्ण आडवाणी की शुरुआती शिक्षा लाहौर में ही हुई पर बाद में भारत आकर उन्होंने मुंबई के गवर्नमेंट लॉ कॉलेज से लॉ में स्नातक किया। आज वह भारतीय राजनीति में एक बड़ा नाम हैं। महात्मा गांधी के बाद वह दूसरे जननायक हैं जिन्होंने हिन्दू आन्दोलन का नेतृत्व किया और पहली बार बीजेपी की सरकार बनावाई।
हिन्दुओं में नई चेतना का सूत्रपात करने वाले आडवाणी साल 1951 में डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी की पार्टी जनसंघ के साल 1957 तक पार्टी सचिव रहे। साल 1973 से लेकर 1977 तक आडवाणी ने भारतीय जनसंघ के अध्यक्ष का दायित्व संभाला। साल 1980 में भारतीय जनता पार्टी की स्थापना के बाद से 1986 तक लालकृष्ण आडवाणी पार्टी के महासचिव रहे। इसके बाद साल 1986 से 1991 तक पार्टी के अध्यक्ष पद का उत्तरदायित्व भी संभाल चुके हैं।
राम रथ यात्रा में निभाई थी अहम भूमिका
गौरतलब है कि, साल 1990 में राम मंदिर आंदोलन के दौरान उन्होंने सोमनाथ से अयोध्या के लिए राम रथ यात्रा निकाली थी। हालांकि, आडवाणी को बीच में ही गिरफ़्तार कर लिया गया था लेकिन इस यात्रा के बाद आडवाणी का राजनीतिक कद और बड़ा हो गया। 1990 की रथयात्रा ने लालकृष्ण आडवाणी की लोकप्रियता को चरम पर पहुंचा दिया था। साल 1992 में बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद जिन लोगों को अभियुक्त बनाया गया है उनमें आडवाणी का नाम भी शामिल है।
बीजेपी में अहम भूमिका
लालकृष्ण आडवाणी तीन बार भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष पद पर रह चुके हैं। आडवाणी चार बार राज्यसभा के और पांच बार लोकसभा के सदस्य रह चुके हैं। साल 1977 से 1979 तक पहली बार केन्द्रीय सरकार में कैबिनेट मंत्री की हैसियत से दायित्व निभाया था। आडवाणी इस दौरान सूचना प्रसारण मंत्री रहे।
राजनीतिक जीवन में सत्ता का जो सर्वोच्च पद उन्हें मिला वह एनडीए शासनकाल के दौरान उपप्रधानमंत्री का है। लालकृष्ण आडवाणी साल 1999 में एनडीए की सरकार बनने के बाद अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में केन्द्रीय गृह मंत्री बने और फिर इसी सरकार में उन्हें 29 जून 2002 को उपप्रधानमंत्री पद का दायित्व भी सौंपा गया था।
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