संतोष कुमार सिंह
नयी दिल्ली: संसद के विशेष सत्र में आज बहुप्रतिक्षित महिला आरक्षण विधेयक पेश किया गया। साथ ही सरकार ने हमेशा की तरह इस विधेयक का नाम बदल दिया और जो बिल पेश किया उसे 128वां संविधान संशोधन बिल यानी नारी शक्ति वंदन विधेयक कहा गया और लोकसभा में पेश किया गया। यदि यह विधेयक पास हो जाता है तो लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% रिजर्वेंशन लागू किया जाएगा।
इस फॉर्मूले के मुताबिक, लोकसभा की 543 सीटों में 181 महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।लेकिन जो लोग इस बात पर खुश हो रहे हैं कि आगामी आम चुनाव में महिलाओं को इसका लाभ मिलेगा, उन्हें थोड़ा मायूस होना पड़ेगा क्योंकि नए विधेयक में सबसे बड़ा पेंच ये है कि यह डीलिमिटेशन यानी परिसीमन के बाद ही लागू होगा।
ये परिसीमन इस विधेयक के बाद होने वाली जनगणना के आधार पर ही होगा। 2024 में होने वाले आम चुनावों से पहले जनगणना और परिसीमन करीब-करीब असंभव है। यानी विधानसभा और लोकसभा के चुनाव समय पर हुए तो इस बार महिला आरक्षण लागू नहीं होगा। यह 2029 के लोकसभा चुनाव या इससे पहले के कुछ विधानसभा चुनावों से लागू हो सकता है।
बदल जायेगा संसद का गणित
यदि नरेंद्र मोदी की सरकार नारी शक्ति वंदन विधेयक को पारित कराने में कामया होती है तो इससे संसद का गणित बदल जायेगा। इस बाबत कानून मंत्री अर्जुनराम मेघवाल ने कहा कि हम ऐतिहासिक बिल लाने जा रहे हैं। अभी लोकसभा में 82 महिला सांसद हैं, इस बिल के पास होने के बाद 181 महिला सांसद हो जाएंगी। यह आरक्षण सीधे चुने जाने वाले जन प्रतिनिधियों के लिए लागू होगा। यानी यह राज्यसभा और राज्यों की विधान परिषदों पर लागू नहीं होगा। लोकसभा की कार्यवाही 20 सितंबर तक के लिए स्थगित कर दी गई है।
बिल पर कौन साथ, कौन पास
महिला आरक्षण के मुद्दे पर श्रेय लेने की होड़ मची हुई है। सब महिलाओं के साथ खड़ा दिखना चाहते हैं। इस बाबत कांग्रेस ने श्रेय लेने की कोशिश की और कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि मनमोहन सिंह के कार्यकाल के दौरान बिल लाया गया था। यह बिल अभी मौजूद है। इस पर गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि हम नया बिल लाए हैं। आप जानकारी दुरुस्त कर लीजिए। इसके बाद विपक्षी सांसदों ने बिल की कॉपी को लेकर हंगामा किया। इनका कहना था कि उन्हें बिल की कॉपी नहीं मिली है। सरकार का कहना था कि बिल को अपलोड कर दिया गया है।
वहीं कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि अब दलगत राजनीति से ऊपर उठें। हम महिला आरक्षण बिल पर बिना शर्त के समर्थन करेंगे।विपक्ष भी महिला आरक्षण बिल के पक्ष मेंतेलंगाना के मुख्यमंत्री केसीआर की बेटी के. कविता ने 13 सितंबर को दिल्ली में 13 विपक्षी दलों के साथ बैठक की थी। इस दौरान उन्होंने संसद में बजट सत्र के दूसरे चरण में महिला आरक्षण बिल पेश करने की मांग की थी।कविता ने कहा था कि उनकी पार्टी भारत राष्ट्र समिति (BRS) का विश्वास है कि महिलाओं के लिए रिजर्वेशन के साथ-साथ कोटा के भीतर कोटा पर भी काम किया जाना चाहिए।
कविता लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण की मांग कर रही हैं। इसी मांग को लेकर कविता ने 10 मार्च को दिल्ली में एक दिन की भूख हड़ताल की थी। इसमें AAP, अकाली दल, PDP, TMC, JDU, NCP, CPI, RLD, NC और समाजवादी पार्टी समेत कई पार्टियां शामिल हुई थीं, लेकिन कांग्रेस ने हिस्सा नहीं लिया था।लेकिन आज जब महिला आरक्षण विधेयक पेश किया गया तो विपक्षी दल भी साथ दिखे और नीतीश कुमार की पार्टी जदयू ने भी महिला आरक्षण बिल पर सरकार के साथ खड़ा होना तय किया है।
हालाकि लालू की पार्टी राजद और अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी का स्टैंड साफ नहीं हुआ है कि वे महिला आरक्षण विधेयक पर सरकार का साथ देंगे या कोटा अंडर कोटा की मांग को लेकर विरोध करते हुए अपने पुराने स्टैंड पर कायम रहेंगे।