2014 के राज्य विधानसभा चुनावों से पहले, भूपिंदर सिंह हुड्डा के नेतृत्व वाली तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने सत्ता में आने पर क्लर्कों के वेतनमान को अपग्रेड करने और उन्हें पंजाब के बराबर करने की घोषणा की थी। हालाँकि, कांग्रेस चुनाव हार गई और इसके साथ ही क्लर्कों और अन्य कर्मचारियों की उम्मीदें धरी की धरी रह गईं।
हरियाणा के लगभग 15,000 क्लर्क 5 जुलाई से ही अपने वेतन में बढ़ोतरी की मांग को लेकर हड़ताल कर रहे हैं। एक साथ इतने क्लर्कों के हड़ताल पर जाने से सरकारी कार्यालयों का कामकाज ठप हो गया है जिससे राज्य सरकार को भारी नुकसान भी झेलना पड़ रहा है। हड़ताल करने वाले क्लर्कों की एक ही मांग है जिसने उन्हें विरोध पथ पर उतरने के लिए मजबूर किया है और वो है lsquo;सरकारी विभागों में समान रैंक के पदों के बराबर मूल वेतन
प्रदर्शनकारी क्लर्कों का कहना है कि1957 में एक सरकारी क्लर्क को 60 रुपये से 175 रुपये मासिक मूल वेतन मिलता था। समान स्तर के अन्य सरकारी कर्मचारियों को उस समय समान या उससे कम वेतन मिलता था। लेकिन अब अन्य समान रैंक वाले अधिकारियों - जैसे जेबीटी (जूनियर बेसिक टीचर), जूनियर इंजीनियर, वन विभाग में डिप्टी रेंजर और स्वास्थ्य विभाग में बहुउद्देश्यीय स्वास्थ्य कार्यकर्ता (एमपीएचडब्ल्यू) का मूल वेतन 35,400 रुपये प्रति माह की दर से मिल रहा है, जबकि क्लर्कों को 19,900 रुपये प्रति माह का मूल वेतन मिल रहा है।
प्रदर्शनकारियों ने कहा है कि पड़ोसी राज्य पंजाब अपने क्लर्कों को 32,100 रुपये प्रति माह का मूल वेतन दे रहा है जो हरियाणा की तुलना में बहुत अधिक है। 2014 के राज्य विधानसभा चुनावों से पहले, भूपिंदर सिंह हुड्डा के नेतृत्व वाली तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने सत्ता में आने पर क्लर्कों के वेतनमान को अपग्रेड करने और उन्हें पंजाब के बराबर करने की घोषणा की थी। हालाँकि, कांग्रेस चुनाव हार गई और इसके साथ ही क्लर्कों और अन्य कर्मचारियों की उम्मीदें धरी की धरी रह गईं।
इतने काम हो रहे हैं प्रभावित
क्लर्कअपने मूल वेतन को न्यूनतम 35,400 रुपये मासिक तक बढ़ाने की मांग के साथ 5 जुलाई से ही हड़ताल कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी क्लर्कों के साथ अब हरियाणा मिनिस्ट्रियल स्टाफ ने भी हाथ मिला लिया है। बता दें कि क्लर्कों के हड़ताल से तहसीलों में जमीन की रजिस्ट्री नहीं हो रही है और आरटीए कार्यालयों में वाहनों के पंजीकरण नहीं हो पा रहे हैं। एसडीएम कार्यालयों में लाइसेंस बनाने व उनके नवीनीकरण की प्रक्रिया पूरी तरह से थम गई है।इसके अलावा राज्य भर में जिला मुख्यालय और ब्लॉक स्तर पर विभाग के कामकाज को भी प्रभावित किया है।
कल हो सकती है सीएम से मुलाकात
बता दें कि क्लर्कों द्वारा किए जा रहे हड़ताल को रोकने के प्रयास में हरियाणा के मुख्यमंत्री के विशेष कर्तव्य अधिकारी (ओएसडी) जवाहर यादव प्रदर्शनकारियों के साथ पहले एक बार बैठक कर चुके हैं। उन्होंने कहा था किप्रति माह 35,400 रुपये का मूल वेतन देना हमारे लिए फिलहाल संभव नहीं है। लेकिन हमें उम्मीद है कि मामला जल्द ही सुलझ जाएगा। वहीं अब क्लर्कों ने सीएम के ओएसडी से बात करने से मना कर दिया है। अब कल सीएम मनोहर लाल के साथ क्लर्कों की 12 बजे मुलाकात होनी है।