नई दिल्ली: महान स्वतंत्रता सेनानी शहीद सुखदेव थापर की आज 116वीं जयंती मनाई जा रही है। उनका जन्म 15 मई, 1907 को पंजाब के लुधियाना में हुआ था। सुखदेव के पिता का नाम रामलाल और मां का नाम लल्ली देवी था। सुखदेव के बचपन में ही उनके पिता का निधन हो गया था जिसके बाद उनकी मां, ताऊ और ताई ने सुखदेव का पालन-पोषण किया। स्कूल की पढ़ाई समाप्त करने के बाद उन्होंने 1922 लाहौर के नेशनल कॉलेज में प्रवेश लिया था।
बचपन से देखा आजाद भारत का सपना
अंग्रेजों ने भारत को 200 साल तक गुलामी की जंजीरों में बांधे रखा। उन्होंने देश में अपनी हुकुमत कायम करने की पूरी कोशिश की। भारत को ब्रिटिश सरकार से आजादी दिलाने के लिए सैकड़ों क्रांतिकारियों ने अपनी जान न्यौछावर कर दिया। उन्हीं महान वीरसपूतों में से एक थे सुखदेव थापर। बचपन से ही सुखदेव ने ब्रिटिश राज के अत्याचारों को देखा और समझना शुरू कर दिया था। 1919 में अमृतसर के जलियांवाला बाग में हुए नरसंहार ने सुखदेव के मन पर बहुत गहरा असर हुआ था। उस वक्त वो महज 12 साल के थे। सुखदेव ने छोटी सी उम्र में ही आजाद भारत का सपना देखा था।
देश की आजादी के लिए हुए शहीद
सुखदेव ने भारत को आजादी दिलाने के लिए अंग्रेजों से जमकर लोहा लिया। देश के लिए उन्होंने अपना सर्वोच्च न्यौछावर कर दिया। सुखदेव को भगत सिंह और राजगुरु के साथ 23 मार्च, 1931 को अंग्रेजों ने फांसी दे दी गई थी।