#InternationalDanceDay: कब हुई शुरूआत ? जानिए इस दिन का उद्देश्य

नई दिल्ली: हम अक्सर जब खुश होते हैं तो नाचते हैं गाते हैं झूमते है। खुशियां और जश्न मनाने का हमारा यह खास अंदाज होता है। जब हमारा मन बहुत ज्यादा प्रस्न्न होता है और इंज्वॉय करने का मूड होता है तो हम नाचते हैं गाते हैं। डांस करने के बहुत सारे फायदे भी होते हैं। इससे हमारा शरीर स्वस्थ होता है और हमारी बॉडी काफी एक्टिव रहती है।

यूनेस्को ने शुरू किया था इंटरनेशनल डांस डे

डांस के प्रति लोगो को जागरुक करने और इसके फायदे बताने के लिए इंटरनेशल डांस डे मनाया जाता है। इस दिन की शुरूआत 29 अप्रैल 1982 को हुई थी। इस खास दिन को यूनेस्को के इंटरनेशनल थिएटर इंस्टिट्यूट की डांस कमेटी ने स्थापित किया था। अंतर्राष्ट्रीय नृत्य दिवस प्रसिद्ध रिफॉर्मर जीन जार्ज नावेरे के जन्म की याद के रुप में सेलिब्रेट किया जाता है।

इंटरनेशनल डांस डे का उद्देश्य

इंटरनेशनल डांस डे का उद्देश्य पूरी दुनिया को डांस के महत्व को बताना है। नाच एक कला है जो मानव के द्वारा रची हुई अद्भुत रचना है। विश्वभर में डांस के कई सारे फॉर्म हैं। भारत में नाच की पुरानी परंपरा और संस्कृति रही है। अलग-अलग प्रदेशों में वहां की संस्कृति के हिसाब से नाच की कई विधाए हैं। जैसे- भरतनाट्यम, कथकली, कथक, कुचिपुड़ी, मणिपुरी आदि नाच की शैलियां है। इसी तरह विदेशी नाच में ब्रेक डांस, हिप हॉप, कंटेम्परी आदी डांस फॉर्म होते हैं। साल 2005 में नृत्य दिवस को प्राथमिक शिक्षा के रूप में केंद्रित किया गया।

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