मुख्यमंत्री मनोहर लाल के साथ एमबीबीएस छात्रों की बैठक..सरकार सहमत तो छात्र दिखे असहमत

हरियाणा में मेडिकल छात्रों के बांड पॉलिसी पर चल रहे विवाद को लेकर जब छात्र मुख्यमंत्री से मिलने पहुंचे तो ऐसी उम्मीद थी कि जरूर कोई न कोई सकारात्मक नतीजा निकलेगा और हड़ताल खत्म हो जाएगी। लेकिन जैसा कि आम तौर पर ऐसी बैठकों में होता है कि दोनो पक्ष कुछ विंदूओं पर सहमत होते हैं तो कुछ पर असहमत और आगे बातचीत का रास्ता बना रहता है। क्योंकि लोकतंत्र में बातचीत ही एक जरिया है जिसके सहारे बड़ी से बड़ी समस्या सुलझ जाती है।

आपको बता दें कि लगभग 2 महीने से ज्यादा समय से मेडिकल प्रशिक्षुओं और सरकार के बीच विवाद चल रहा था। इस पर आज प्रशिक्षुओं का एक दल सीएम मनोहर लाल से मिला और लगभग 5 घंटे से ज्यादा यह बैठक चली। इस बैठक में कई अहम् फैसले लिए गए। छात्रों के साथ हुई बातचीत के बाद जब मुख्यमंत्री मीडिया कर्मियों से मुखातिब हुए तो ऐसा लग रहा था कि सकारात्मक बातचीत हुई है और कुछ विंदूओं पर मुख्यमंत्री ने छात्रों को ठोस आश्वासन भी दिया है।

मनोहर लाल ने कहा कि हमने 2 साल पहले मेडिकल बांड पॉलिसी बनाई थी। बांड की राशि अन्य सभी स्थानों से ज़्यादा रखी गयी थी। ताकि डॉक्टर्स सरकारी नौकरी को प्राथमिकता दे। इस बांड पॉलिसी में 7 साल का प्रावधान था जिसे अब 5 कर दिया गया है। इस अवधी में छात्रों को को सरकारी संस्थानों में सेवाएं देनी होगी। इसके अतिरिक्त पीजी करने का टाइम पीरियड इसमें जोड़ दिया गया है।

इतना ही नहीं मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि बांड राशि को 40 लाख की जगह 30 लाख किया गया है। 1 साल के अंदर कांट्रेक्ट पर नौकरी देने की बात भी मुख्यमंत्री ने कहा। जहां तक बांड का सवाल है तो यह पैसा डॉक्टर की फैमिली को नही देना है। यह सरकार, बैंक और छात्रों के बीच समझौता है। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि पीजी की पॉलिसी अलग से बनेगी। बेटियों के लिए इस फीस में 10 फीसदी की छूट देने की बात भी कही गई। बातचीत को सकारात्मक बताते हुए मुख्यमंत्री ने उम्मीद जताई कि जल्द ही कोई रास्ता निकलेगा। उन्होंने कहा कि ज्यादातर छात्र मान गए हैं कुछ छात्रों की असहमती है। उनपर आगे बातचीत होगी।

क्या है छात्रों की राय

बैठक के बाद जब छात्र बाहर निकले तो उनके सुर मुख्यमंत्री की बातों से मेल नहीं खा रहे थे और उन्होंने सिरे से इस बात को खारिज कर दिया कि आज की बैठक में कोई सहमती बनी है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि आज की बैठक के बाद वे बाकी के छात्रों से बातचीत करेंगे और आगे की रणनीति तय करेंगे। उन्होंने कहा कि जब तक प्रतिनिधियों की तरफ से कोई स्पष्टीकरण नहीं आता तब तक किसी भी निर्णय को अंतिम ना माना जाए। इसके अतिरिक्त स्टूडेंट्स ने एक दिन का समय की मांग की है ताकि इसपर क्या चाहते हैं छात्र

विद्यार्थी अनिवार्य गवर्नमेंट सर्विस चाहते हैं।

सरकार लोन रिपेमेंट की बात कर रही है।

नौकरी चाहिए हमारे से या 40 लाख रूपया चाहिए। हम तो नौकरी करने के लिए तैयार हैं।

जो बच्चे तैयार हैं सरकारी नौकरी करने के लिए उनसे बांड की बात न हो।

यदि एक साल तक सरकार नौकरी नहीं देती है तो ये बांड निरस्त हो जाएगा।

पॉलिसी का उद्देश्य डॉक्टरों की कमी को दूर करना है या ​बांड में बांधना है।

बांड को एक साल तक रखा जाए। सरकार 5 साल तक बांड निर्धारित करना चाहती है।

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